बांदा। बुंदेलखंड पैकेज से कराए गए कार्यों की जांच के लिए इन दिनों प्रदेश सरकार की ओर से आई विशेष टीम बुंदेलखंड मेें डेरा डाले है। टीम ने सबसे पहले बुंदेलखंड पैकेज से चित्रकूटधाम मंडल में बनवाई गईं नवीन मंडियों की जांच-पड़ताल की तो पाया कि विशिष्ट मंडी और ग्रामीण अवस्थापना केंद्रों के निर्माण में खर्च किए गए दो अरब 66 करोड़ रुपये बेमतलब साबित हो रहे हैं।
जो मंडियां बनकर तैयार हैं, वे भी तीन-तीन साल से वीरान पड़ी हैं। कई मंडियों के निर्माण की समय सीमा खत्म हुए तीन साल से ज्यादा हो गए, फिर भी वे अधूरी हैं। भारी भरकम बजट से तैयार इन मंडियों का किसानों को कोई लाभ नहीं मिल रहा है। टीम ने कड़ा रुख अपनाया तो मंडी परिषद के अफसरों की शामत आ सकती है।
बुंदेलखंड विकास पैकेज से बांदा में 20, हमीरपुर में 24, चित्रकूट में 16 और महोबा में 11 नवीन मंडी/ग्रामीण अवस्थापना केंद्र बनाए गए हैं। इन पर दो अरब 66 करोड़ 62 लाख रुपये खर्च हुए। सबसे ज्यादा बांदा में 72 करोड़ 37 लाख 32 हजार रुपये मंडियोें पर खपाए गए। चित्रकूट मेें 62 करोड़ 58 लाख 36 हजार, महोबा मेें 61 करोड़ 25 लाख 65 हजार और हमीरपुर मेें 70 करोड़ 40 लाख 85 हजार रुपये खर्च किए गए हैं।
इनका निर्माण वर्ष 2012 या 13 मेें शुरू हो गया था। मंडी परिषद के मुताबिक हमीरपुर में विशेष मंडी यार्ड का निर्माण 30 सितंबर तक पूरा हो सकेगा, जो फरवरी 2013 से बन रहा है। 48 करोड़ 41 लाख 75 हजार रुपये लागत है। बांदा मेें विशिष्ट मंडी फरवरी 2013 से बन रही है।
अभी तक पूरी नहीं हुई। इसी जून में पूरा होने का दावा किया जा रहा है। इसी मंडी स्थल पर 20 हजार मीट्रिक टन क्षमता का गोदाम अगस्त 2014 में बनकर तैयार हो गया था, जो आज तक वीरान पड़ा है।
इसके अलावा 16 ग्रामीण अवस्थापना केंद्र फरवरी 2013 मेें बनकर तैयार हो गए थे। सभी वीरान पड़े हैं। भवन के चारों ओर झाड़ियां उग आईं हैं। बिल्डिंग भी जर्जर होती जा रही हैं। हमीरपुर में 23 ग्रामीण अवस्थापना केंद्र जनवरी 2013 में बनकर तैयार हो चुके हैं। इनमें ज्यादातर सूने पड़े हैं। महोबा में विशिष्ट मंडी का काम इसी माह पूरा होगा, जबकि 10 ग्रामीण अवस्थापना केंद्र वर्ष 2013 में ही पूरे हो चुके हैं।
चित्रकूट जिले में विशिष्ट मंडी फरवरी 2014 से अब तक नहीं बन पाई। इसे इसी वर्ष सितंबर में पूरा करने का दावा किया जा रहा है। इनके अलावा 15 ग्रामीण अवस्थापना केंद्र दो वर्ष पूर्व बनकर तैयार हो चुके हैं, लेकिन आबाद नहीं हुए।