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छात्राओं ने प्रधानाचार्य पर लगाया अधिक वसूली का आरोप

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प्रधानाचार्य के विरोध में ज्ञापन लेकर प्रदर्शन करतीं जीजीआईसी, कमासिन की छात्राएं। - फोटो : BANDA
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बांदा। कमासिन जीजीआईसी की छात्राओं ने डिप्टी कलक्टर और जिला विद्यालय निरीक्षक को ज्ञापन दिया। इसमें प्रधानाचार्य और उनके पति पर आर्थिक और मानसिक शोषण करने का आरोप लगाया है। 23 सूत्री मांगपत्र में कहा है कि कोरोना संक्रमण काल में आर्थिक तंगी के हालात हैं। इसके बावजूद कक्षा 9 से 12 तक की छात्राओं से प्रवेश शुल्क के नाम पर 1300 रुपये से 1650 रुपये तक वसूले जा रहे हैं। रसीद भी नहीं दी जा रही।
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सोमवार को छात्राएं स्वतंत्रता स्मारक अशोक लाट पर इकट्ठा होने के बाद कलक्ट्रेट पहुंचीं। यह फीस वृद्धि को लेकर खफा थीं। छात्राओं ने अधिकारियों को दिए ज्ञापन में बताया कि लगभग 85 गांवों के मजरों और पुरवों की छात्राएं यहां अध्ययनरत हैं।
आरोप लगाया कि प्रधानाचार्य मनमानी कर रही हैं। सत्र 2019 में एनसीसी ड्रेस वितरण के लिए 500 रुपये वसूल लिए गए, लेकिन ड्रेस नहीं दी गई। स्कूल भवन परिसर में लगे पंखों की मरम्मत और टूटे फर्श की मरम्मत के लिए भी छात्राओं से 200-200 रुपये वसूले गए। यह सब पैसा हड़प लिया गया। छात्रवृत्ति फार्म ऑनलाइन कराने के लिए भी 150 रुपये से 200 रुपये तक वसूलने का दबाव बना रही हैं, जबकि बाहर मात्र 50 रुपये में ऑनलाइन आवेदन हो रहे हैं।
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टीसी काटने के लिए 30 से 50 रुपये शुल्क लिया जा रहा है। छात्राओं ने सक्षम अधिकारी से जांच कराकर कार्रवाई की मांग की है। प्रदर्शन और ज्ञापन देने वाली छात्राओं में किरन मौर्य, खुशबू मिश्रा, सुमन देवी, आरती यादव, मधु देवी, खुशी मिश्रा, खुशी देवी आदि शामिल रहीं।
उधर, प्रधानाचार्य हेमलता वर्मा ने आरोपों को गलत बताया। कहा कि निर्धारित सरकारी फीस ही ली जा रही है। फीस की सूची स्कूल के सूचना बोर्ड पर चस्पा है। इसकी रसीद भी दी जाती है। छात्रवृत्ति ऑनलाइन फार्म भरने के लिए 50 रुपये ही लिए जा रहे हैं।
अभिभावकों पर बना रहे फीस का दबाव
बांदा। इंगलिश मीडियम स्कूलों में फीस वसूले जाने से खफा छात्रों ने डीएम को संबोधित ज्ञापन दिया। दिव्यांशु मिश्रा, गगन साहू, आशू त्रिपाठी, यश कालवानी और प्रशांत पाल आदि छात्रों ने कहा कि कोरोना काल में सभी स्कूल बंद हैं।
छात्र-छात्राओं घरों में अध्ययन कर रहे हैं, लेकिन स्कूल संचालक अभिभावकों पर फीस अदायगी का दबाव बना रहे हैं। फीस न देने पर नाम काटने की धमकी दी जा रही है। जांच और कार्रवाई की मांग की है।
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