बांदा। नालों पर अतिक्रमण करने वालों के निर्माण ध्वस्त कराने वाली नगर पालिका परिषद खुद पांच फीट चौड़े नाले के अस्तित्व के लिए खतरा बन रही है।
पालिका महाराणा प्रताप चौक से पुलिस लाइन की ओर जाने वाली सड़क पर मंडलीय चिकित्सालय के बाहर करीब 200 मीटर लंबे नाले के ऊपर वेंडिंग जोन बनवा रही है। नाले के ऊपर ही दुकानों के फाउंडेशन बनाए जा रहे हैं।
नगर पालिका सामान्य तौर पर नालों पर अतिक्रमण और अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई करती है। ऐसे में उसी नाले के ऊपर स्थायी फाउंडेशन बनाकर वेंडिंग जोन तैयार कराने से उसकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। पुलिस लाइन रोड पर नगर पालिका नाले के ठीक ऊपर ही निर्माण करा रही है।
निर्माण स्थल के ठीक नीचे से करीब छह फीट गहरा और पांच फीट चौड़ा नाला गुजर रहा है। फाउंडेशन के निर्माण के साथ नाला दबता जा रहा है। इससे भविष्य में नाला धंसने की आशंका से भी इन्कार नहीं किया जा सकता है। यदि किसी हिस्से में नाला धंसता है तो उसके ऊपर बना निर्माण भी हादसे का कारण बन सकता है।
वेंडिंग जोन के लिए नाले के ऊपर फाउंडेशन तैयार करने के बीच-बीच में कुछ स्थान छोड़े जा रहे हैं। नगर पालिका का दावा है कि इससे नाले की सफाई में परेशानी नहीं होगी लेकिन करीब 200 मीटर लंबे नाले पर दुकानों के फाउंडेशन बनने के बाद सफाईकर्मियों और मशीनों की पहुंच कितनी प्रभावी रहेगी, यह आसपास के लोगों का बड़ा सवाल है।
नाले में सिल्ट और कचरा जमा होने पर सफाई के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिल सकेगी। नाला बंद होने की स्थिति में जलनिकासी प्रभावित होने और बारिश में जलभराव की समस्या बढ़ने की आशंका भी है।
नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी श्रीचंद्र ने बताया कि यहां वेंडिंग जोन बनाया जा रहा है। फाउंडेशन तैयार होने के बाद टिनशेड लगाए जाएंगे। हालांकि यह काम किस योजना के तहत कराया जा रहा है, इसकी जानकारी वह नहीं दे सके। उनका कहना है कि नाले की सफाई में कोई परेशानी नहीं होगी लेकिन नाले के ऊपर ही निर्माण क्यों कराया जा रहा है, इस सवाल का स्पष्ट जवाब नहीं मिल सका।
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जिस सड़क पर निर्माण, उसी विभाग को नहीं दी जानकारी
मंडलीय चिकित्सालय के बाहर जिस सड़क पर यह निर्माण कराया जा रहा है, वह ओडीआर (अन्य जिला मार्ग) है और लोक निर्माण विभाग प्रांतीय खंड के अधीन है। वहीं दूसरी ओर निर्माण स्थल मंडलीय चिकित्सालय की बाउंड्री से लगा हुआ है।
इसके बावजूद लोक निर्माण विभाग और स्वास्थ्य विभाग दोनों को निर्माण की जानकारी नहीं होने की बात सामने आई है। रोड साइड कंट्रोल एक्ट के तहत ओडीआर पर निर्माण के लिए निर्धारित दूरी और अन्य नियमों का पालन जरूरी होता है।
शहरी क्षेत्र में सड़क से 30 फीट और बाहरी क्षेत्र में 50 फीट के बाहर निर्माण किए जाने का प्रावधान बताया गया है। ऐसे में लोक निर्माण विभाग की सहमति या एनओसी के बिना सड़क किनारे निर्माण कराए जाने पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
सीएमओ डॉ. विजेंद्र सिंह ने बताया कि निर्माण के संबंध में उनसे कोई पत्राचार या जानकारी नहीं की गई है। वहीं अधिशासी अभियंता प्रांतीय खंड लोक निर्माण विभाग मनोज कुमार पांडेय ने भी निर्माण की किसी जानकारी से इन्कार किया है। ऐसे में सवाल है कि नगर पालिका ने किस अनुमति और किस योजना के तहत नाले और सड़क के बीच यह निर्माण शुरू कराया है।
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खुद ही हटवाया था अतिक्रमण
नगर पालिका ने कुछ माह पूर्व नाले के ऊपर अस्थायी रूप से किए गए अतिक्रमण को हटवाया था। यहां सालों से कब्जा किए लोगों ने इसका विरोध भी किया था लेकिन अतिक्रमण तो हटना ही था। किसे पता था कि बाद में पालिका ही खुद नाले पर निर्माण शुरू करा देगी।