बांदा। जिला पंचायत चुनाव निपटने और दीपावली के मौके पर स्टांप शुल्क में पांच गुना तक की तैयारी प्रदेश सरकार ने दो महीने पहले ही गुपचुप ढंग से शुरू कर दी थी। अमर उजाला ने इसका खुलासा 28 सितंबर को खबर छापकर कर दिया था। अब रजिस्ट्री बैनामा, तलाक, वसीयत आदि महंगा हो गया है।
सोमवार को प्रदेश के मंत्रिमंडल (कैबिनेट) ने जिस फैसले पर मुहर लगाई है उसका ताना-बाना सितंबर से ही चल रहा था। प्रदेश सरकार ने बेहद खामोशी से सभी जनपदों के निबंधक कार्यालयों से स्टांप ड्यूटी की मौजूदा दरें और बढ़ोत्तरी के प्रस्ताव मांगे थे। संभावित बढ़ी दरें अमर उजाला ने 28 सितंबर 2015 को प्रकाशित कर दी थीं। प्रदेश सरकार द्वारा की गई वृद्धि में निबंधन शुल्क (स्टांप ड्यूटी) 10 हजार से बढ़ाकर 20 हजार कर दी है। महंगाई की सबसे तगड़ी चपत तलाक पर पड़ी है।
तलाक देने वालों को अब 10 रुपये के स्टांप शुल्क के बजाए 500 रुपये देना पड़ेंगे। वसीयत के लिए 100 रुपये के स्थान पर 500 रुपये लगेंगे। 10 रुपये के स्टांप पर लिखी जाने वाली अटार्नी विशेष अब 250 रुपये के स्टांप पर लिखी जाएगी। इसी तरह सामान्य अटार्नी का स्टांप शुल्क 50 रुपये से बढ़ाकर 500 रुपये हो गया है।
निबंधक कार्यालय से रजिस्ट्री आदि की नकल के लिए अब तक मात्र 15 रुपये शुल्क लिया जाता रहा है। इसे बढ़ाकर 100 रुपये कर दिया गया है। रजिस्ट्री कार्यालय में अभिलेखों के मुआयने की फीस 5 रुपये से बढ़कर 10 रुपये लगेगी। मुख्तारनामा आदि का रजिस्ट्रेशन शुल्क भी 70 रुपये से बढ़कर 500 रुपये हो गया है।
50 लाख से ज्यादा हर माह बढ़ेगा राजस्व
बांदा। स्टांप शुल्क में की गई वृद्धि से निबंधन विभाग के राजस्व में जोरदार इजाफा होगा। एक अनुमान के मुताबिक पांचों तहसीलों में स्थित निबंधन कार्यालयों की आमदनी 50 लाख रुपये प्रतिमाह से ज्यादा बढ़ जाएगी। बांदा की सदर तहसील में ही लगभग 20 से 25 लाख रुपये प्रतिमाह राजस्व बढ़ेगा। निबंधन कार्यालय सूत्रों के मुताबिक मौजूदा समय में सदर कार्यालय में प्रतिमाह लगभग 40 से 50 लाख रुपये राजस्व स्टांप ड्यूटी के रूप में मिलता है।
टैक्स बढ़ा रहे हैं, सुविधाएं कुछ नहीं
बांदा। हर साल बढ़ रही स्टांप ड्यूटी और सर्किल दरों पर महंगाई का बोझ झेल रहे उपभोक्ताओं का कहना है कि सरकार टैक्स तो लगातार बढ़ा रही है लेकिन आम नागरिकों की बुनियादी सुविधाओं में कोई इजाफा नहीं हो रहा। शहर और कस्बों के कितने मोहल्ले ऐसे हैं जहां सर्किल दरें तो हजारों रुपये प्रति वर्ग मीटर है, पर वहां बुनियादी सुविधाएं भी मयस्सर नहीं है। सड़क, सफाई, बिजली-पानी जैसी समस्याओं की भरमार है। तुलसी नगर, सर्वोदय नगर, कुशवाहा नगर आदि इसकी बानगी हैं। इंदिरा नगर जैसे महंगे और पॉश इलाके को दो दशक बाद भी नगर पालिका क्षेत्र में शामिल नहीं किया जा सका है।