अतर्रा। रघुनाथ भवन में श्रीराम चरित मानस समाज की ओर से आयोजित रामलीला के आठवें दिन मंगलवार रात दशरथ, केवट संवाद और भरत मिलाप की लीलाओं का भावपूर्ण मंचन हुआ।
कलाकारों ने लीला के माध्यम से त्याग, भाईचारा, भक्ति और मर्यादा का संदेश दिया। रामलीला में भगवान श्रीराम के वनगमन से व्यथित राजा दशरथ पुत्र वियोग सहन नहीं कर सके और अपने प्राण त्याग दिए।
वहीं वन जाते समय केवट और श्रीराम के संवाद में प्रभु के प्रति अनन्य भक्ति और समर्पण का सुंदर चित्रण हुआ। भरत मिलाप के मंचन में भाई भरत का श्रीराम के प्रति अगाध प्रेम और त्याग देखने को मिला।
कमेटी के महंत ताराचंद्र तिवारी ने बताया कि वशिष्ठ की भूमिका में रामजी, मोनू ने राम, सचिन ने लक्ष्मण, पुष्पेंद्र तिवारी ने सीता और भरत, लखन शर्मा ने दशरथ, किशोर कुमार ने कैकेई, ताराचंद्र ने केवट की भूमिका निभाई। अध्यक्ष कालका प्रसाद शिवहरे, आचार्य शिवम दीक्षित, कमलेश पटेल समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
परशुराम-लक्ष्मण संवाद ने मोहा
तिंदवारी। श्रीरामलीला कमेटी के तत्वावधान में कस्बे में आयोजित रामलीला महोत्सव के तीसरे दिन मंगलवार की रात धनुष यज्ञ और परशुराम-लक्ष्मण संवाद का मंचन हुआ। लीला में धनुष भंग के बाद भगवान परशुराम और लक्ष्मण के बीच हुए ओजस्वी संवाद ने दर्शकों को रोमांचित किया।
राजा जनक की भूमिका में पंडित आशीष चतुर्वेदी, परशुराम के रूप में कानपुर के कुलदीप त्रिपाठी और लक्ष्मण की भूमिका में रविकांत मिश्रा छुन्ना ने प्रभावशाली अभिनय किया। कार्यक्रम में तिंदवारी के पूर्व विधायक दलजीत सिंह, सपा नेता दिलीप लखेरा, पूर्व चेयरमैन बृजेश सिंह पटेल, चेयरमैन सुधा रमेश साहू और अमेरिका निवासी प्रवासी भारतीय संत कुमार शिवहरे व दर्शक मौजूद रहे।
कमेटी प्रबंधक हरवंश श्रीवास्तव के नेतृत्व में आयोजन संपन्न हुआ। अध्यक्ष अनिल लखेरा, महामंत्री अरविंद गुप्त, कोषाध्यक्ष नमन गुप्त ने व्यवस्थाएं संभालीं। (संवाद)
फोटो 24- तिंदवारी में परशुराम-लक्ष्मण संवाद पर प्रस्तुति देते कलाकार। संवाद