बांदा। डीएम की बेटी के पेट में उठा दर्द तो खोल दिया अल्ट्रासाउंड कक्ष की खबर अखबारों की सुर्खियां बनी तो करीब 11 दिन से बंद अल्ट्रासाउंड कक्ष का ताला शुक्रवार को आम मरीजों के लिए खोल दिया गया। सुबह अस्पताल पहुंची डीएम जे. रीभा ने सीएमएस को मरीजों का अल्ट्रासाउंड करने की हिदायत दी। कहा कि इसमें लापरवाही नहीं होनी चाहिए। दिन भर में करीब 16 मरीजों का अल्ट्रासाउंड किया गया।
सीएमएस डॉ. एसडी त्रिपाठी के रिटायर होने के बाद जिला पुरुष अस्पताल के रेडियोलॉजिस्ट डॉ. किशुन कुमार को 30 जून को सीएमएस का चार्ज दे दिया गया। इसके बाद रेडियोलॉजिस्ट डॉ. किशुन कुमार ने अल्ट्रासाउंड कक्ष पर ताला डाल दिया। सीएमएस के विभागीय कार्य करने लगे। 10 जुलाई तक लगातार 11 दिन अल्ट्रासाउंड सेवा बंद रहने मरीज परेशान हो रहे थे।
गुरुवार को डीएम की बेटी के पेट में दर्द हुआ तो बेटी को लेकर जिला अस्पताल पहुंचीं। ओपीडी में डाॅ. आरके गुप्ता को दिखाया तो उन्होंने अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह दी। इस पर सीएमएस ने अल्ट्रासाउंड कक्ष का ताला खोलकर डीएम की बेटी का अल्ट्रासाउंड किया था। इसके बाद फिर से कक्ष पर ताला लगा दिया था जबकि तमाम महिलाएं अल्ट्रासाउंड कराने के लिए चिकित्सक का इंतजार कर ही थीं। सीएमएस की यह कारगुजारी उन पर भारी पड़ी और कर्तव्य के प्रति लापरवाही पर सुर्खियों में आ गए।
अल्ट्रासाउंड सेवा बंद होने की खबर सुर्खियां बनीं तो शुक्रवार की सुबह 9:43 बजे डीएम जे. रीभा पैथालॉजी स्थित अल्ट्रासाउंड कक्ष पहुंचीं। 10 मिनट पहले ही सीएमएस डॉ. किशुन कुमार पहुंचे थे। मरीजों का पर्चा जमा करवाने के बाद अल्ट्रासाउंड शुरू किया। जिलाधिकारी ने सीएमएस से कहा कि सभी मरीजों का अल्ट्रासाउंड किया जाए। इसमें लापरवाही नहीं होनी चाहिए। 11वें दिन 16 से अधिक मरीजों का अल्ट्रासाउंड किया गया। अब यह सेवा पूर्ववत जारी रहेगी।
कर्मचारी को फोन कर कहा-पर्चा जमा कराओ
शुक्रवार को डॉ. किशुन कुमार सुबह 8:30 बजे सीएमएस कक्ष में बैठे थे। डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मचारी रजिस्टर पर हस्ताक्षर कर रहे थे। पैथालॉजी स्थित अल्ट्रासाउंड कक्ष के बाहर मरीज आते रहे। वहां तैनात कर्मचारी ने चिकित्सक न होने की बात कही। धीरे-धीरे मरीज वापस जाने लगे। इसी बीच 9:25 बजे सीएमएस का एक कर्मचारी के पास फोन आया और कहा कि अल्ट्रासाउंड के लिए आने वाले मरीजों के पर्चे जमा करवाओ। दो मरीजों के पर्चे ही जमा हुए थे कि 9 बजकर 33 मिनट पर सीएमएस पैथालॉजी पहुंचे। अल्ट्रासाउंड कक्ष का ताला खोलकर मरीजों का अल्ट्रासाउंड शुरू किया गया। 10 मिनट बाद ही जिलाधिकारी जे. रीभा भी आ गईं।
एडी ने लिखा पत्र, सीएमएस और रेडियालॉजिस्ट की निभाएं जिम्मेदारी
अपर निदेशक चिकित्सा एवं परिवार कल्याण डॉ. रेखा रानी ने कहा कि सीएमएस का चार्ज मिल जाने के बाद अल्ट्रासाउंड सेवा बंद नहीं की जानी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि पद पर रहते हुए भी जिम्मेदारियों का निर्वहन करना चाहिए। बताया कि उन्होंने सीएमएस को पत्र लिखकर कहा है कि सीएमएस के साथ ही रेडियोलॉजिस्ट की जिम्मेदारी निभाते हुए अल्ट्रासाउंड सेवा जारी रखें। चित्रकूटधाम मंडल के सभी जिला अस्पतालों में एक-एक ही रेडियोलॉजिस्ट है। किसी भी जिले से दूसरे रेडियोलॉजिस्ट को तैनात किया जाना मुमकिन नहीं है।
11 दिन में मरीजों की जेब से निकल गए तीन लाख रुपये
अल्ट्रासाउंड सेवा बंद होने से जिला अस्पताल आने वाले ज्यादातर मरीजों ने प्राइवेट पैथालॉजी में अल्ट्रासाउंड कराया। वहां हर मरीज से 700 रुपये से एक हजार तक लिए गए। जिला पुरुष अस्पताल में एक दिन में 70 से 80 अल्ट्रासाउंड किए जाते थे। यहां के अल्ट्रासाउंड कक्ष पर ताला लगा होने से मरीजों को प्राइवेट सेंटरों की शरण लेनी पड़ी। इस तरह 11 दिनों में अल्ट्रासाउंड के नाम पर मरीजों की जेब से तीन लाख रुपये निकल गए। शहर के मर्दननाका मोहल्ला की राबिया ने बताया कि पांच दिनों से अल्ट्रासाउंड कराने प्रतिदिन पैथालॉजी जा रही थी लेकिन चिकित्सक न होने से वापस जाना पड़ता था।
फोटो- 26 सुनैना। संवाद
20 किमी. दूरी से आई सुनैना का हुआ अल्ट्रासाउंड
शहर से करीब 20 किलोमीटर दूर स्थित मटौंध कस्बे से सुनैना देवर के साथ अस्पताल की पैथालॉजी पहुंची। 9 बजकर 50 मिनट पर उनका रेडियोलॉजिस्ट ने अल्ट्रासाउंड किया। सुनैना ने बताया कि दो दिन से लौट रही थीं। बताया जा रहा था कि अल्ट्रासाउंड वाले डॉक्टर नहीं थे। शुक्रवार को यह सोचकर आई थी कि अगर डॉक्टर नहीं मिले तो प्राइवेट सेंटर में अल्ट्रासाउंड कराएंगी।