बांदा। पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी के पार्टी छोड़ने के फैसले के बाद कांग्रेस हाईकमान उन्हें मनाने में जुटा है। उत्तर प्रदेश के प्रभारी अविनाश पांडेय और प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने लखनऊ में नसीमुद्दीन के आवास पर पहुंचकर उनसे मुलाकात की और रात्रि भोजन किया। लगभग डेढ़ घंटे चली इस मुलाकात में कांग्रेस नेताओं ने नसीमुद्दीन की नाराजगी दूर करने का प्रयास किया, लेकिन फिलहाल यह प्रयास बेनतीजा रहा। नसीमुद्दीन अपने फैसले पर अडिग हैं, जबकि कांग्रेस नेताओं का कहना है कि उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया है।
वर्ष 2018 से कांग्रेस का हिस्सा रहे नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने इसी माह 24 जनवरी को कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता सहित कई पदों से इस्तीफा दे दिया था। इस्तीफे के कारण स्पष्ट नहीं किए गए थे, बस अपरिहार्य कारणों का जिक्र था। उधर, इस्तीफे का शोर मचते ही अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी, दिल्ली द्वारा उत्तर प्रदेश के प्रभारी बनाए गए अविनाश पांडेय और प्रदेश अध्यक्ष अजय राय शनिवार को देर शाम नसीमुद्दीन के लखनऊ स्थित आवास पहुंच गए। उन्होंने वहीं नसीमुद्दीन के साथ रात्रि का भोजन भी किया।
सूत्रों के मुताबिक लगभग डेढ़ घंटे तक चली बातचीत में प्रदेश प्रभारी और प्रदेश अध्यक्ष ने नसीमुद्दीन की नाराजगी दूर करने की भरपूर कोशिश की। उनके तमाम गिले-शिकवे सुने। उन्होंने अपने इस्तीफे के साथ 73 अन्य कांग्रेसियों के भी इस्तीफा देने का दावा किया था। सूत्रों के अनुसार, नसीमुद्दीन की नाराजगी का मुख्य कारण उनके राजनीतिक अनुभव और वरिष्ठता की अनदेखी होना है। कांग्रेस प्रदेश प्रभारी और अध्यक्ष ने उन्हें भरोसा दिलाकर पार्टी में बने रहने का आग्रह किया लेकिन नसीमुद्दीन फिलहाल अपने फैसले पर पुनर्विचार करने को तैयार नहीं दिख रहे हैं।
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समर्थकों के साथ मिलकर तय करेंगे अगली रणनीति
नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने पुष्टि की है कि उनके समर्थक, विशेषकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों से, बड़ी संख्या में कांग्रेस छोड़ चुके हैं और यह सिलसिला जारी है। इन सभी साथियों के साथ आगे की रणनीति तय करने के लिए वह 31 जनवरी या पहली फरवरी को लखनऊ में एक बैठक बुला रहे हैं। इस बैठक में साथियों की सलाह के आधार पर यह तय किया जाएगा कि क्या उन्हें प्रदेश में बनने वाले विभिन्न दलों के संयुक्त मोर्चे में शामिल होना है या अपना अलग मोर्चा बनाना है। राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि नसीमुद्दीन सिद्दीकी पिछड़े, दलितों और अल्पसंख्यकों को साधने के लिए बनने वाले किसी नए राजनीतिक गठबंधन का अहम हिस्सा बन सकते हैं।
नसीमुद्दीन के समर्थन में गुलाम गौस ने छोड़ी पार्टी
नरैनी। कांग्रेस में जिले की राजनीति गरमा गई है। कद्दावर नेता नसीमुद्दीन के इस्तीफे के बाद जिला सचिव गुलाम गौस ने भी लगभग 50 कार्यकर्ताओं के साथ पार्टी छोड़ दी है। उन्होंने अपना इस्तीफा जिलाध्यक्ष को सौंप दिया है। गुलाम गौस ने कहा कि नसीमुद्दीन वरिष्ठ नेता हैं और मुस्लिम समाज के मुखिया के रूप में जाने जाते हैं। उन्होंने हमेशा समाज के हितों की लड़ाई लड़ी है। गौस ने आरोप लगाया कि पार्टी में जमीनी कार्यकर्ताओं की अनदेखी हो रही है, जिससे असंतोष बढ़ रहा है। (संवाद)