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विदेशों में भी अश्लील वीडियो और फोटो का किया आदान-प्रदान

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बांदा : अदालत के गेट पर वाहन से उतरते सीबीआई के अधिवक्ता व अन्य। - फोटो : BANDA
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बांदा। बच्चों के यौन उत्पीड़न के आरोपी निलंबित जेई रामभवन को रिमांड पर लेने के लिए सीबीआई और बचाव पक्ष दोनों ने ही अदालत के सामने दलीलें रखीं। सीबीआई के अधिवक्ता अशोक कुमार सिंह का कहना था कि अभियुक्त विवेचना में सहयोग नहीं कर रहा।
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बच्चों का अश्लील वीडियो और फोटो बनाकर बेचा है। अश्लील वेबसाइटों पर लिस्ट/लोड किया है। अन्य व्यक्तियों के नाम फेक ई-मेल आईडी बनाकर भारत एवं विदेशी नागरिकों से अश्लील वीडियो और फोटोग्राफ आदान-प्रदान किए जाने का साक्ष्य विवेचना में मिला है।
सीबीआई अधिवक्ता ने कहा कि विवेचना के दौरान कुछ बच्चों का नाम-पता ज्ञात हुआ है। अभियुक्त से उनकी पहचान और अन्य पीड़ित बच्चों के नाम पता किए जाने हैं। अभियुक्त के घर में जो बच्चों के फोटो, रिकार्डिंग, इलेक्ट्रानिक डिवाइस मिले हैं उनके बारे में वह सही नहीं बता रहा।
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दूसरी तरफ अभियुक्त के अधिवक्ता अनुराग पटेल व देवदत्त तिवारी ने अदालत को बताया कि सीबीआई ने रिमांड अर्जी किसी राजपत्रित अधिकारी से अग्रसारित नहीं कराई है। रिमांड सिर्फ थर्ड डिग्री प्रयोग करने के लिए लिया जा रहा है।
न्यायाधीश मोहम्मद रिजवान अहमद ने अपने आदेश में कहा है कि सीबीआई द्वारा उपलब्ध कराए गए साक्ष्यों के अनुसार अभियुक्त रामभवन को सीबीआई ने पहली बार 16 नवंबर को रिमांड मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया। ऐसी स्थिति में उसी दिन से 15 दिन की गणना की जाएगी। यह 30 नवंबर को पूरी होगी।
सीबीआई ने रिमांड अर्जी 17 नवंबर को दी है। यह निर्धारित अवधि 15 दिन के अंदर है। अत: रिमांड दिया जा सकता है। न्यायाधीश ने इस बारे में सुप्रीम कोर्ट द्वारा सीबीआई बनाम अनुपम जे. कुलकर्णी एआईआर-1992 की नजीर भी दी।
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