फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

विधाता ने विधवा बनाया, हौसले से घर चलाया

विज्ञापन
The creator made a widow, ran the house with enthusiasm - फोटो : BANDA
विज्ञापन
बांदा। अपने जीवन साथी/हमसफर को खो बैठने वाली महिलाएं जबरदस्त चुनौतियों और संघर्षों का सामना करतीं हैं। अक्सर उन्हें अपने मानवीय अधिकार और हक हासिल करने के लिए अपनों से ही लंबी लड़ाई लड़नी पड़ती है। पति के निधन के बाद पत्नी को एक नए रिश्ते का नाम दिया गया है, जिसे विधवा कहते हैं। विश्व विधवा दिवस (23 जून) को कुछेक ऐसी ही प्रेरणादायक विधवाओं के हौसलों की कहानी उन्हीं की जुबानी।
विज्ञापन

केस-एक
सिलाई की कमाई से पाल दिया परिवार
सिर्फ 36 की युवा उम्र में ही रानी गुप्ता (खुटला, बांदा) का सुहाग उजड़ गया। पति राजकुमार गुप्ता (किराना व्यवसायी) का पीलिया से आकस्मिक निधन हो गया। रानी पर तीन बेटियों और एक बेटे को पालने की चुनौती आ खड़ी हुई। ईश्वर द्वारा ली गई परीक्षा से रानी विचलित नहीं हुई। घर में सिलाई मशीन से फॉल-पीको की सिलाई शुरू कर दी। इससे होने वाली मामूली आमदनी में ही रानी ने न सिर्फ घर चलाया बल्कि तीनों बेटियों खुशबू, सुष्मिता और अंशिता की शादियां भी कर दीं। बेटे को किराने की दुकान करा दी। युवा उम्र अपनी खुशियां बच्चों के लिए समर्पित कर देने वाली रानी गुप्ता खुशहाल जीवन बिता रहीं हैं। किसी तरह का गिला शिकवा नहीं। सिवाय पति को गवां देने के दुख को छोड़कर।
केस-दो
आंगनबाड़ी की नौकरी से पाल लीं बेटियां
बीज व्यवसायी प्रकाशचंद्र के 1994 में बीमारी से आकस्मिक निधन के बाद पत्नी सुरुचि गहरे सदमे में आ गई। महज 30 वर्ष की उम्र में मांग से सुर्ख सिंदूर मिट गया। सुरुचि को अपने अलावा तीन मासूम बेटियां भी संभालना थीं। ईश्वर ने पति छीना तो कुछ ही दिन बाद सुरुचि को आंगनबाड़ी की नौकरी से नवाजा। सुरुचि ने नौकरी के साथ बेटियों की पढ़ाई पर पूरा ध्यान लगा दिया। फिलहाल पिछले वर्ष एक बेटी की शादी कर दी है। दो की पढ़ाई जारी है। अब सुरुचि की पूरी रुचि अपने परिवार की परवरिश पर है।
विज्ञापन

केस तीन
मेहनत-मजदूरी करके बेटियों को दी तालीम
पेशे से मोटर कार डेंटर इरशाद की असामयिक मौत के बाद यासमीन पिछले 24 सालों से विधवा जीवन जी रहीं हैं। तीन बच्चों के पालन-पोषण का भी जिम्मा बखूबी निभा रहीं है। मेहनत-मजदूरी करके बेटे को मोटर मैकेनिक का काम सिखाया। दोनों बेटियों को लखनऊ के मदरसे में आलिमा का कोर्स कराया। काम में मेहनत, वफादारी और जिम्मेदारी की यासमीन में खूबियां यहां की वरिष्ठ मशहूर महिला चिकित्सक डॉ. शबाना रफीक को भा गईं। उन्होंने यासमीन को घर में काम देकर फैमली मेंबर के रूप में संरक्षण दिया।

The creator made a widow, ran the house with enthusiasm- फोटो : BANDA

The creator made a widow, ran the house with enthusiasm- फोटो : BANDA

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें