अतर्रा। नहरें चलाई गईं पर तालाब नहीं भर सके। इस भीषण गर्मी में मवेशियों व जंगली पशुओं का हलक सूख रहा है। राजकीय नलकूप से भी तालाब नहीं भरवाए जा रहे। क्षेत्र के ज्यादातर तालाबों के सूखे होने से स्थिति भयावह होती जा रही है।
समाजसेवी राकेश गौतम मेजर ने बताया कि केन कैनाल के सहायक अधिशासी अभियंता की लापरवाही से पशु पेयजल योजना का क्रियान्वयन नहीं हो पा रहा। क्षेत्र के महुटा, तुर्रा, महोतरा, कुसमा, थनैल, बल्लान, बसरेही, पौहार, चंदौर समेत एक दर्जन से अधिक गांवों के तालाबों में एक बूंद भी पानी नहीं भरा गया। ब्रांच के पास स्थित कुछ तालाबों को छोड़कर सभी सूखे पड़े हैं।
एक मई से 15 मई तक केन कैनाल की नहर चलाई गई, लेकिन उस पानी को तालाबों की बजाय नदी-नालों में बहा दिया गया। कहा कि अधिशासी अभियंता की लापरवाही से ग्रामीण, किसान, पशु-पक्षी जल संकट से जूझ रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से तालाबों को तत्काल भराए जाने व दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की।