युवक के गोली मारकर आत्महत्या की वजह फसल की बर्बादी के साथ कर्ज अदायगी के लिए बैंक का बढ़ता दबाव ही बताई जा रही है। एक हफ्ते पूर्व बैंक प्रबंधक ने गांव आकर कर्ज अदायगी के लिए कहा था।
उसके बाद बैंक के गुर्गे लगातार दबाव बना रहे थे। सुसाइड से कुछ क्षणों पहले किसान अपनी बर्बाद फसल देखकर लौटा था। बिसंडा क्षेत्र के सिकलोढ़ी गांव में किसान रामनरेश द्विवेदी (40) ने वर्ष 2009 से इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक, पुनाहुर से 80,000 रुपये कर्ज लिया था। यह मौजूदा में बढ़कर 1 लाख 60 हजार रुपये हो गया।
फसल पर टूटे कुदरत के कहर से अदायगी की कोई गुंजाइश नहीं हुई। रामनरेश के भाई नरेंद्र द्विवेदी उर्फ गुड्डा ने बताया कि करीब एक हफ्ते पहले बैंक शाखा प्रबंधक ने गांव आकर ग्राम प्रधान के घर उसे बुलाकर कर्ज अदायगी के लिए दबाव डाला था। इसकी पुष्टि ग्राम प्रधान हिम्मत सिंह ने भी की है।
उसके बाद से लगातार बैंक के कुछ गुर्गे रामनरेश पर कर्ज अदायगी का दबाव डाल रहे थे। तब से वह तनाव में था। रामनरेश के पास 25 बीघा जमीन थी।भाई नरेंद्र और प्रधान हिम्मत सिंह ने बताया कि रविवार को शाम घर के लोग खेत में बारिश से बर्बाद हो चुकी फसल साफ कर रहे थे। इसी बीच रामनरेश वहां पहुंच गया।
फसल की हालत देखकर उसने घर वालों से अफसोस जताया और वापस घर लौट आया। घर आते ही छोटे भाई नरेंद्र की लाइसेंसी रायफल से खुद को सीने में गोली मार ली। खून में लथपथ हालत में भाई नरेंद्र और ग्राम प्रधान हिम्मत सिंह सहित पड़ोसी उसे जिला अस्पताल लाए। इलाज से पहले ही उसकी मौत हो गई।
-पुनाहुर शाखा के ब्रांच मैनेजर गोपाल गुप्ता ने कहा कि कर्ज देना तो सरकार की योजना में शामिल है। रही बात रामनरेश द्विवेदी की तो मैं उसे नहीं जानता। एक माह से मैं सिकलोढ़ी गांव गया ही नहीं। मेरी ब्रांच से बड़ी संख्या में किसान कर्ज लिए हैं इसलिए बिना रिकार्ड देखे यह बताना मुश्किल है कि कौन कर्जदार है और कितना?