बांदा। बुंदेलखंड क्षेत्र में मत्स्य पालन को नई दिशा देने के लिए सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। तालाबों में एरेशन सिस्टम की स्थापना से मछलियों के उत्पादन में अभूतपूर्व वृद्धि की उम्मीद है। इस योजना के तहत मत्स्य पालकों को इस उन्नत तकनीक को अपनाने के लिए 80 प्रतिशत तक का अनुदान प्रदान किया जाएगा, जिससे उनकी आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी।
एरेशन सिस्टम का मुख्य कार्य तालाबों के पानी में ऑक्सीजन का स्तर बढ़ाना है। यह न केवल मछलियों को स्वस्थ रखने में मदद करता है, बल्कि पानी के पीएच और अन्य महत्वपूर्ण मापदंडों को भी संतुलित रखता है। इन पर्यावरणीय अनुकूलताओं के कारण, मछलियों का विकास तेजी से होता है और कम समय में अधिक उत्पादन प्राप्त होता है। वर्तमान में बुंदेलखंड के 132 जलाशयों में मत्स्य पालन का कार्य किया जाता है। सर्दी और गर्मी के मौसम में तापमान में भारी उतार-चढ़ाव के कारण अक्सर पानी में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है, जिससे मछलियों की मृत्यु दर बढ़ जाती है और मत्स्य पालकों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। एरेशन सिस्टम इस समस्या का प्रभावी समाधान प्रदान करेगा।
अनुदान योजना और लक्ष्य
राज्य सेक्टर योजना के तहत, मत्स्य पालकों को एरेशन सिस्टम की कुल लागत का 80 प्रतिशत अनुदान के रूप में मिलेगा। चित्रकूटधाम मंडल के चारों जनपदों में कुल 80 एरेशन सिस्टम लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए मत्स्य पालकों से सात जनवरी तक ऑनलाइन आवेदन मांगे गए हैं। अब तक, मंडल में 12 मत्स्य पालकों ने इस प्रणाली को स्थापित करने के लिए आवेदन किया है, जो इस योजना के प्रति बढ़ती रुचि को दर्शाता है।
पांच एकड़ के तालाबों में मत्स्य पालन की स्थिति
चित्रकूटधाम मंडल के विभिन्न जनपदों में पांच एकड़ के तालाबों में मत्स्य पालन का कार्य किया जा रहा है। इन तालाबों की संख्या इस प्रकार है
जनपद
तालाबों की संख्या
बांदा
11
महोबा
13
हमीरपुर
10
चित्रकूट
11
योग
45
-
मत्स्य पालक वैज्ञानिक तकनीकों का उपयोग करके अपनी आय को काफी बढ़ा सकते हैं। एरेशन सिस्टम मछलियों की असमय होने वाली मौतों को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जिससे उत्पादकों को निरंतर लाभ प्राप्त होता है। यह प्रणाली न केवल उत्पादन बढ़ाती है, बल्कि मत्स्य पालन को अधिक टिकाऊ और लाभदायक व्यवसाय बनाने में भी सहायक है।
- सुधीर कुमार जिला मत्स्य पालन अधिकारी