मौसम की मार सब्जियों पर भी पड़ रही है। एक पखवाड़े से भीषण गर्मी और गर्म हवाओं ने केन नदी तट पर रेत में लगी सब्जियों को झुलसा दिया है। इससे सब्जियों का उत्पादन कम हो रहा है और बाजार में दाम भी बढ़ गए हैं।
गंछा, कहला, भूरागढ़, कनवारा, अछरौड़ समेत करीब पचास गांव केन नदी के किनारे आबाद हैं। नदी के रेत में सब्जी की बारियां लगाकर तमाम गरीब अपनी जीविका चलाते हैं। अप्रैल से जुलाई तक नदी से ककड़ी, खीरा, तरबूज, करैला, कद्दू, भिंडी, लौकी, तरोई व परवल आदि सब्जी का अच्छी पैदावार होती है।
इधर तापमान में वृद्धि ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। नदी किनारे लगीं बारियां लू के थपेड़ों से झुलस गईं हैं। बारियां सूखने से सब्जी व फलों की आवक कम हो रही है। इससे बाजार में हरी सब्जियों के भाव भी बढ़ रहे हैं। लौकी 10 रुपये प्रति किलो, करेला व कद्दू 20 रुपए किलो, कद्दू 20, भिंडी 20 और खीरा 20 रुपये किलो बिक रहा है।