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एचटी लाइन के करंट से किशोरी और बाबा की मौत

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गुगौली गांव में घटनास्थल पर पुलिस और परिजन। - फोटो : BANDA
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चिल्ला (बांदा)। हाईटेंशन लाइन के नीचे झूल रहे सपोर्टिंग वायर के संपर्क में आ जाने पर करंट से किशोरी और उसके बाबा की मौके पर मौत हो गई। सूचना मिलने पर एसडीएम ने राजस्व टीम के साथ घटनास्थल का निरीक्षण किया। उधर, घटना को लेकर ग्रामीणों रोष है। इनका कहना है कि आए दिन जर्जर तार टूटकर गिरते रहते हैं। इससे ग्रामीणों की जान जा रही है।
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घटना थाना क्षेत्र के गुगौली गांव में गुरुवार को सुबह की है। अलीशेर की 17 वर्षीय पुत्री अशरा नहर के पास भैंस चराने गई थी। हांकते समय उसका हाथ नीचे लटक रहे हाईटेंशन लाइन के सपोर्टिंग वायर में छू गया और वह करंट में चिपक गई। उसकी मौके पर ही मौत हो गई। वायर भी खिंचकर नीचे आ गिरा।
कुछ देर बाद वहां पहुंचे उसके बाबा इमामुद्दीन (60) ने उसे छुड़ाने का प्रयास किया तो उनका पैर भी तार से छू आ गया। करंट से उनकी भी मौत हो गई। जानकारी मिलने पर पहुंचे ग्रामीणों ने पलरा सब स्टेशन में फोन करके आपूर्ति बंद कराई। इसके बाद करंट से दोनों शवों को अलग किया। कुछ देर बाद थाना इंस्पेक्टर रामाश्रय सिंह फोर्स के साथ पहुंचे और शवों का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
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पैलानी एसडीएम रामकुमार ने भी राजस्व टीम के साथ घटनास्थल का निरीक्षण किया। आश्रितों को हर संभव मदद का भरोसा दिया। ग्रामीणों ने घटना पर रोष जताते हुए दोषी बिजली कर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की। अशरा के मामा सद्दाम (मदनपुर) ने बताया कि अशरा 8वीं कक्षा की छात्रा थी। दो बहनों में छोटी थी। पिता खेतीबाड़ी करके परिवार का गुजर बसर करते हैं।
अशरा की मां की आठ साल पूर्व हो चुकी मौत
चिल्ला। अशरा की मां की आठ साल पूर्व मौत हो चुकी है। पहली पत्नी की मौत के दो साल बाद ही पिता अलीशेर ने दूसरी शादी कर ली थी। परिजनों के मुताबिक अशरा होशियार थी और घर की पूरी जिम्मेदारी संभाले थी। बाबा और पिता के साथ खेतीबाड़ी में भी हाथ बंटाती थी। मां की मौत पर उदास होने में पिता और दूसरी मां उसे गले लगाकर समझाते और दुलारते थे। वह घर में सबकी चहेती थी।
जांच के बाद दिया जाता है मुआवजा
करंट से मौत पर मुआवजे के मामले में अधिशासी अभियंता ग्रामीण अजय कुमार सविता का कहना है कि विद्युत सुरक्षा निदेशालय के अभियंता जांच करते हैं। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद मुआवजा दिया जाता है। इस प्रक्रिया में छह से छह माह का समय लगता है। करंट से मृत्यु पर एफआईआर और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाती है। करंट से मृत्यु होने पर तीन लाख रुपये तक और झुलसने पर 50 हजार रुपये तक मुआवजा देने का प्रावधान है।
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