बांदा। नरैनी से बसपा विधायक गयाचरण दिनकर विधानसभा में स्वामी प्रसाद मौर्य का स्थान लेंगे। हालांकि बसपा विधानमंडल दल का नेता चुने गए गयाचरण दिनकर का विधानसभा में नेता विरोधी दल बनने की औपचारिकता अभी बाकी है। कभी बच्चों को पढ़ाने वाले गयाचरण अब बसपा के दिग्गज नेताओं में शामिल हो गए हैं।
बसपा संस्थापक कांशीराम के संघर्ष के साथी माने जाने वाले गयाचरण दिनकर को बसपा के मिशन का बखूबी ज्ञान है। उनको भाषण लंबा देने की आदत है लेकिन उबाऊ नहीं, लोगों को बांधे रखने वाला। साधारण घराने के गयाचरण दिनकर कभी पैतृक गांव गौरीखानपुर में खुद का स्कूल खोलकर बच्चों को पढ़ाते थे।
आर्थिक तंगी के चलते वे अपनी पढ़ाई इंटर से आगे नहीं बढ़ा सके। बसपा के वजूद में आने पर 1986 में पार्टी से जुड़ गए। अब तक ये विधानसभा के सात चुनाव लड़ चुके हैं। चार बार जीते हैं और तीन बार हार का सामना करना पड़ा। 1991 में बबेरू से पहली बार विधायक बने। वर्ष 2002 मेें मायावती सरकार में ग्राम्य विकास मंत्री बने।
वर्ष 2012 में उन्होंने अपना चुनाव क्षेत्र बदल दिया। वे नरैनी सुरक्षित सीट से चुनाव जीतकर विधायक बने। मौजूदा में विधानसभा में उप नेता प्रतिपक्ष हैं। अब उन्हें विधानसभा में बसपा नेता विधानमंडल दल चुना गया हैं। बसपा मुखिया मायावती ने दिनकर को संगठन के कामों में भी लगा रखा है। वे मंडल कोआर्डिनेटर हैं। यूपी, दिल्ली और झारखंड के प्रभारी रह चुके हैं।
बांदा के नेताओं को दोनों सदनों में कमान
बांदा। प्रदेश के इतिहास में शायद यह पहला मौका है जब विधानसभा और विधानपरिषद में विपक्ष की कमान एक ही जिले के विधायकों के हाथ में होगी। विधानसभा में गयाचरण दिनकर के बसपा विधानमंडल दल के नेता चुने जाने के बाद यह रिकार्ड बना है।
बांदा के नसीमुद्दीन सिद्दीकी विधानपरिषद में नेता प्रतिपक्ष हैं। बसपा के दोनों धुरंधर अक्सर पार्टी के कार्यक्रमों या अन्य अवसरों पर एक साथ नजर आते हैं। पिछले माह मूंगुस पुरवा में भूख से दलित की मौत होने पर दोनों नेताओं ने मूंगुस पुरवा जाकर मृतक की विधवा को पार्टी की ओर से तीन लाख रुपये सौंपे थे।
बसपाइयों में जोश और खुशी
बांदा। स्वामी प्रसाद मौर्य की बगावत से सकते में आए यहां के बसपाइयों में अब नया जोश है। गयाचरण दिनकर को महत्वपूर्ण जिम्मेेदारी मिलने से ये खुश हैं। जिलाध्यक्ष प्रदीप वर्मा, जिला पंचायत पूर्व अध्यक्ष बल्देव वर्मा, कोआर्डिनेटर रामकिशोर वर्मा, लल्लू निषाद, मुमताज अली आदि का कहना है कि अब बसपा दोनों ही सदनों में प्रदेश और खासकर बुंदेलखंड और बांदा की आवाज पूरी दमदारी से उठा सकेगी।