अतर्रा। थाना क्षेत्र के भद्रकाली रोड निवासी और महुआ ब्लाक में मनरेगा तकनीकी सहायक संजय त्रिपाठी के बाइक सवार बेटे को तेज रफ्तार कार ने सोमवार को टक्कर मार दी, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। युवक कर्नाटक में होटल मैनेजमेंट का छात्र था। बेकाबू कार ने बाइक सवार को रौंदने के पहले एक साइकिल सवार को टक्कर मारकर घायल कर दिया।
मनरेगा तकनीकी सहायक संजय त्रिपाठी का 22 वर्षीय पुत्र आयुश त्रिपाठी सोमवार को सुबह बाइक पर अपने साथी ब्रम्ह नगर निवासी आकाश विश्वकर्मा के साथ टहलने निकला था। बांदा-प्रयागराज राष्ट्रीय राजमार्ग में कैलाश नगर के पास तेज रफ्तार बेकबू कार ने उसे टक्कर मार दी। बाइक आयुशचला रहा था। वह कार में फंसकर दूर तक घिसटता भी चला गया था। आयुश मणिपाल यूनिवर्सिटी (कर्नाटक) में होटल मैनेजमेंट का छात्र था। आकाश गंभीर रूप से घायल हो गया। दुर्घटना में कार भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। कार चालक इंद्रेश यादव समेत कार सवार दिव्यांशु गुप्ता और अनूप तिवारी गंभीर रूप से घायल हो गए।
ये सभी कानपुर नगर के शिवराजपुर के रहने वाले हैं। राहगीरों के मुताबिक, बाइक सवार आयुश और उसके साथी को टक्कर मारने से पहले कार ने साइकिल सवार बनसखा गांव निवासी कृष्णा को ठोकर मारकर घायल कर दिया। वह सब्जी लेकर घर जा रहा था। सभी घायलों को पुलिस ने एंबुलेंस से सीएचसी पहुंचाया। यहां से उन्हें जिला अस्पताल भेज दिया गया। घायल कार सवारों ने बताया कि वे कानपुर से चित्रकूट अपने दोस्त की सगाई में शामिल होने जा रहे थे। पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। थाना इंस्पेक्टर अखिलेश मिश्रा और दरोगा सूरज पांडेय अस्पताल में घायलों के इलाज की व्यवस्था में डटे रहे।
जुलाई में नौकरी के लिए जाना था अमेरिका
पिता संजय त्रिपाठी ने बताया कि आयुश मणिपाल यूनिवर्सिटी, कर्नाटक में होटल मैनेजमेंट अंतिम वर्ष का छात्र था। लॉकडाउन की वजह से वह घर लौट आया था और ऑनलाइन पढ़ाई कर रहा था। उसका अमेरिका की एक कंपनी में सिलेक्शन हो गया था। जुलाई माह में जॉब के लिए उसे अमेरिका जाना था। पहले से ही आयुश ने तैयारी कर ली थी। मृतक दो भाइयों में बड़ा था। पिता ने बताया कि जब वह महुआ जा रहे थे तो एंबुलेंस उनकी आंखों के सामने से गुजरी, लेकिन उसे क्या पता था कि उसमें पुत्र आयुश का शव है।
आयुश की मौत के साथ सपने भी हो गए दफन
आयुश के भाई मानस ने बताया कि भाई आयुश के विदेश जाने को लेकर परिवार के लोग बेहद खुश थे। पूरे खानदान में वह पहले थे जिन्हें विदेश में नौकरी का अवसर मिला था। आयुश अक्सर कहते थे कि कुछ दिन बाद वह मां अनीता त्रिपाठी और पिता को भी अपने साथ अमेरिका ले जाएंगे, लेकिन सारे सपने उसकी मौत के साथ दफन हो गए। उधर, दिखितवारा ग्राम प्रधान प्रतिनिधि विक्की गौतम, ग्राम पंचायत अधिकारी लालचंद्र कुशवाहा, इंजीनियर धीरेंद्र द्विवेदी सहित प्रभाकर पांडेय, सूरज वाजपेयी, रामू तिवारी, विनय त्रिपाठी, ईशू आदि ने अस्पताल पहुंचकर परिजनों को ढांढस बंधाया।