राष्ट्रीय व राज्य मार्गों से शराब की दुकानें दूर करने के फरमान के बाद आबकारी महकमा सक्रिय हो गया है। जिले में दारू की 116 दुकानें पहली अप्रैल के पहले शिफ्ट होंगी। आदेश के बाद 100 शराब के लाइसेंसी विक्रेताओं ने दुकान हटाने के लिए विभाग को नए स्थान का प्रस्ताव दिया है। जबकि 6 दुकानदारों ने दुकानें हटाने से इंकार करते हुए लाइसेंस सरेंडर कर दिया है। इसमें सिविल लाइन का माडल शॉप भी शामिल है। साथ ही दस ने दुकान शिफ्ट करने के लिए प्रस्ताव नहीं दिया है।
सुप्रीम कोर्ट और शासन ने पिछले माह राष्ट्रीय राजमार्ग व राज्य मार्ग से 500 मीटर हटकर शराब व बीयर की दुकानें शिफ्ट कराने के आदेश दिए थे। मार्च माह में वित्तीय वर्ष के समापन के महज पांच दिन बचे हैं। आबकारी विभाग पर एक तरफ राजस्व वसूली का लक्ष्य पूरा करने का दबाव है तो दूसरी पहली अप्रैल से पहले दुकानें शिफ्ट कराने का फरमान। जिले में झांसी-मिर्जापुर राष्ट्रीय राजमार्ग, बांदा-कानपुर, बांदा-फतेहपुर हाईवे में कुल 116 दुकानें हैं। इन्हें 10 मार्च को नोटिस दी गई थी।
उसमें कहा गया था कि 15 मार्च के पहले दुकानें पांच सौ मीटर दूरी पर विस्थापित करना है। इसके लिए स्थान चयन कर दुकानदार प्रस्ताव भेजें। इसके बाद आबकारी अधिकारी स्थान की जांच पड़ताल कर डीएम का अनुमोदन लेंगे। फिर ये दुकानें शिफ्ट होंगी। लेकिन पांच दिन बचे हैं अभी तक 10 दुकानदारों ने कोई प्रस्ताव नहीं दिया। 100 ने प्रस्ताव दिया है। इनके स्थल के निरीक्षण की प्रक्रिया चल रही है।
6 दुकानदारों ने स्थान परिवर्तन करने से मना करते हुए दुकानों का लाइसेंस सरेंडर कर दिया है। इनके स्थान पर अब नए दुकानदारों को मौका मिलेगा। सरेंडर करने वालों में विदेशी मदिरा की सिविल लाइन की दुकान, पलरा व पपरेंदा के लाइसेंसी दुकान शामिल हैं। बीयर की बबेरू-1 व मुरवल की दुकान शामिल है। रोडवेज बस स्टैंड के निकट देशी शराब के दुकानदार ने भी लाइसेंस सरेंडर किया है।