बांदा। अवैध खनन की सीबीआई जांच पर सुप्रीमकोर्ट की रोक पर खनन माफियाओं ने जश्न मनाया। महंगे होटलों में पार्टी की। साथ ही यहां तैनात कई सरकारी अधिकारियों ने भी राहत की सांस ली है।
बुंदेलखंड के बांदा, उरई, हमीरपुर, महोबा, चित्रकूट आदि जिलों में दशकों से बालू और पत्थर का अवैध खनन हो रहा है। रॉयल्टी के रूप में खनिज विभाग कुछ करोड़ रुपये ही पाता है, जबकि अवैध खनन कराने वाले अरबों रुपये बटोर रहे हैं। इस काली कमाई के कई हिस्सेदार हैं। लखनऊ तक हिस्सा बंटता है।
यही वजह है कि ग्रामीणों के तमाम आंदोलनों, शिकायतों और मीडिया की ढेरों खबरों के बाद भी अवैध खनन पर अंकुश नहीं लग पाई। बसपा सरकार में अवैध खनन परवान चढ़ा, लेकिन सपा सरकार में और पंख लग गए। रॉयल्टी सरकार के खजाने में तो सिंडीकेट का अरबों रुपया जिले से लेकर राजधानी तक बंटवारे में जाता है। बालू की बदौलत कई लोग और सफेदपोश अरबपति हो गए।
बुंदेलखंड और खासकर बांदा में अवैध खनन की जांच नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) भी करा चुकी है। जांच मे अवैध खनन पकड़ा भी गया। एनजीटी ने इसे रोकने के लिए सीसी कैमरे लगाने सहित कई सख्त आदेश पारित किए, लेकिन इस पर रोक नहीं लगी। दो माह पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अवैध खनन और उसमें अधिकारियों की मिलीभगत की जांच की जिम्मेदारी सीबीआई को सौंपी तो माफिया और अफसरों में खलबली मच गई। अगस्त में सीबीआई टीम यहां आकर खनिज विभाग से कई अभिलेख भी ले गई थी।
ऐसे में अवैध खनन करने वालों की नींद उड़ी हुई थी। सीबीआई जांच रुकवाने के लिए प्रदेश सरकार भी एड़ी-चोटी का जोर लगाए रही। साथ ही बुंदेलखंड और बांदा के बड़े बालू कारोबारी काफी दिनों तक दिल्ली में डेरा डालकर सीबीआई जांच रुकवाने की सुप्रीम कोर्ट में पैरवी करते रहे।
अंतत: उन्हें कामयाबी मिल ही गई। सीबीआई जांच के स्टे की खबर मिलतेे ही यहां के कई बालू माफिया ने खुशी मनाई। महंगे होटलों में पार्टियां चलीं। शनिवार से ही माफिया खनन में जुट गए। अवैध खनन कर बालू भी डंप करने लगे हैं।