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मंच के कलाकार लॉकडाउन में हुए लाचार

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कलाकार सुनील सनी, श्रद्धा निगम, संजय काकोनिया, निशा गुप्ता, अंजू दमेले व प्रवीण चौहान। - फोटो : BANDA
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बांदा। मंच की चमचमाती रोशनी में चमकते नजर आने वाले कलाकार भी लॉकडाउन में धुंधले पड़ गए। आत्मसम्मान और झिझक किसी के सामने हाथ फैलाने में आड़े आ गई। नतीजे में जनपद के ज्यादातर कलाकार लॉकडाउन की मार से कराह उठे हैं। 2 जून (मंगलवार) को स्थानीय कलाकारों ने- साजों की सुनों सरकार, नारे के साथ परेशानहाल कलाकारों को दो जून (वक्त) की रोटी की वकालत की।
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सांस्कृतिक व साहित्यिक क्षेत्र की प्रमुख संस्था सरगम के अध्यक्ष व बुंदेलखंड के वरिष्ठ कलाकार सुनील कुमार सनी ने कहा कि बांदा जनपद के 97 फीसदी कलाकार आर्केस्ट्रा, रंगमंच, लोक संगीत, नृत्य व जादू आदि कलाओं के माध्यम से अपना परिवार पाल रहे थे। कोरोना के लॉकडाउन ने उनके पेशे में भी लॉक लगा दिया। ये सभी परिवार आर्थिक तंगहाली की गिरफ्त में हैं। नृत्य गुरु श्रद्धा निगम ने कहा कि उनके बहुत से शिष्य डांस सिखाकर आत्मनिर्भर बन गए थे। अब सब बेरोजगारी का शिकार हो गए हैं। इन्हें सरकारी मदद मिलनी चाहिए। वरिष्ठ मंच कलाकार संजय काकोनिया ने कहा कि लॉकडाउन से सारे सांस्कृतिक और संगीत कार्यक्रमों पर रोक लग गई। कलाकारों के सामने गंभीर संकट है।
एसीडी स्टूडिया निर्देशक और नृत्य गुरु निशा गुप्ता का कहना है कि न सिर्फ मंच के कलाकार, बल्कि नृत्य व संगीत सिखाने वाले गुरु भी आर्थिक तंगी के शिकार हैं। नृत्य गुरु संतोष कुशवाहा और अभिनेता व डांस गुरु प्रवीण चौहान ने कहा कि जनपद में लगभग दो सैकड़ा ऐसे कलाकार हैं जिन्हें तत्काल मदद की दरकार है। श्रेया आकर्ष इंस्टीट्यूट की निदेशक अंजू दमेले ने कहा कि लॉकडाउन ने कलाकारों के सामने दो जूून की रोटी का संकट खड़ा कर दिया है। मंचों पर जादू का प्रदर्शन करने वाले जादूगर आरसी योगा ने कहा कि असंगठित कलाकारों का रजिस्ट्रेशन कराकर सरकार उनकी तत्काल मदद करे।
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