सपा जिला कार्यालय में पसरा सन्नाटा।
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सत्ता रूढ़ समाजवादी पार्टी में जबरदस्त घमासान में उलझे सपाइयों को ‘जन सुनवाई’ की सुध नहीं रही। दो दिन होने वाले इस कार्यक्रम में शनिवार को जिला कार्यालय में सन्नाटा पसरा रहा। नेताओं के न होने पर फरियादी बैरंग लौट गए।
सपा में भारी गहमा-गहमी के बीच शनिवार को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की वापसी को स्थानीय नेता ‘बड़ा दिन’ मान रहे हैं। पारिवारिक फूट में पार्टी टूटने की कगार से चिंतित सपाइयों की निगाहें लखनऊ में लगी रहीं और शनिवार व रविवार को मुख्यमंत्री की प्राथमिकता वाला कार्यक्रम किसी को याद नहीं रहा। बिजलीखेड़ा स्थित जिला कार्यालय सूना पड़ा रहा। बड़े दूर छोटे नेता भी कार्यालय में नजर नहीं आए। कार्यालय प्रभारी विष्णुदत्त यादव ने बताया कि समस्याएं लेकर 3-4 लोग आए थे। कोई नेता नहीं मिले तो लौट गए।
उधर, जिलाध्यक्ष शमीम बांदवी ने बताया कि लखनऊ में पार्टी में उथल-पुथल चल रही थी। सबकी निगाहें ‘नेताजी’ और मुख्यमंत्री की बैठक और फैसलों पर लगी थीं। इससे जनसुनवाई में कोई नेता मौजूद नहीं रहा। सीएम का निष्कासन वापस होने तक उनका भी किसी काम में मन नहीं लग रहा था। पार्टी मुखिया की परिपक्वता व सूझबूझ से सपा बिखरने से बच गई।
जब तक मुलायम, नहीं होगा बंटवारा
सपा सुप्रीमो के नजदीकी व पूर्व मंत्री जमुना प्रसाद बोस ने कहा कि मुख्यमंत्री अखिलेश, मुलायम सिंह यादव और शिवपाल में सत्ता को लेकर कोई मतभेद नहीं है। तीनों के बीच सिर्फ विचारों का मतभेद रहा। जब तक मुलायम सिंह यादव हैं, तब तक सपा का बंटवारा नहीं हो सकता। सीएम का निष्कासन रद्द होना, इसका संकेत है। वह हमेशा समाजवादी रहे हैं और आगे भी रहेंगे।