उत्तर भारत की बर्फबारी ने चित्रकूटधाम मंडल का मौसम उलटकर रख दिया। कई दिनों से हल्के बादल और धूप का मौसम मंगलवार को घने बादल और लगातार बूंदाबांदी में बदल गया। तापमान में तीन डिग्री गिरावट और शीतलहर से मंडल की पूरी आबादी बुरी तरह प्रभावित हुई। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक बुधवार को भी कमोवेश मौसम के तेवर यही रहेंगे।
दिसंबर के दूसरे हफ्ते में मंडल के कई इलाकों में बारिश और ओले गिरे थे। इससे ठंड में जबरदस्त इजाफा हो गया था। कई दिन तक शीतलहर रही। अब इधर कई दिनों से दिन में धूप रहने से तापमान में सुधार आया था।
सोमवार (23 दिसंबर) को अधिकतम 21 और न्यूनतम आठ डिग्री पारा दर्ज किया गया था। मंगलवार को तड़के मौसम में अचानक बड़ा बदलाव आया। गहरे बादलों के साथ लगभग पूरे मंडल में कहीं हल्की तो कहीं तेज बारिश हुई। रिमझिम बूंदों का सिलसिला पूरे दिन चला। तापमान में तीन डिग्री की गिरावट आ गई।
यह अधिकतम 18 डिग्री पर आ गया। रात को न्यूनतम पारा भी छह डिग्री के आसपास दर्ज किया गया। ठंडी हवाओं से पूरा जनजीवन प्रभावित रहा।
बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के मौसम विशेषज्ञ डा. दिनेश साहा ने बताया कि उत्तर भारत में हो रही बर्फबारी से वहां के बादल उत्तर पूर्व की ओर आ गए हैं और पानी बरसा रहे हैं। हवाओं का रुख पछुवा होने से शीतलहर के हालात हैं। उन्होंने अनुमान जताया कि बुधवार को भी मौसम ऐसा ही रहेगा।
जानलेवा ठंड ने वृद्ध महिला की जान ले ली। शहर के कताई मिल क्षेत्र की रहने वाली गोमती देवी (75) पत्नी वीरेंद्र प्रसाद को दो दिन पूर्व ठंड ने जकड़ लिया था। उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। मंगलवार को तड़के अस्पताल में उसकी मौत हो गई ठंड से मरने वालों की संख्या नौ पहुंच गई।
एक सप्ताह बाद ही पुन: बारिश ने किसानों के चेहरों पर चिंता की लकीरें पैदा कर दीं। उनका कहना है कि खेतों में कटी पड़ी धान की फसल को सबसे ज्यादा नुकसान होगा। जहां अभी बुआई हुई है वहां पानी भर जाने से बीज सड़ने की आशंका है। एक हफ्ते पूर्व हुई बारिश से निचले इलाकों वाले खेतों में जलभराव हो गया था।
कई दिनों की धूप से पानी में कमी आई थी। किसान बुआई के लायक जमीन में जोत आने का इंतजार कर रहे थे। इसी बीच मंगलवार को फिर बारिश हो गई। किसान रामसुख गौतम, रमेश तिवारी, ब्रम्हदत्त शुक्ला, रज्जन चौरिहा, राजाभइया यादव आदि ने कहा कि प्रशासन सर्वे कराए और किसानों को मदद दिलाए।