बांदा। स्मार्ट प्रीपेड मीटर उपभोक्ताओं के गले की फांस बन गए हैं। मीटर लगाने के बाद चार-चार माह से बिल नहीं आ रहे हैं। जिनके बिल आए हैं उनके रकम देखकर होश फाख्ता हो चुके हैं। बिजली विभाग के अफसर यह पूरी व्यवस्था ठेके पर होने की बात कहकर उपभोक्ताओं को चलता कर देते हैं। उपभोक्ता इधर से उधर भटक रहे हैं। डीएम के यहां आने वाली शिकायतों में सर्वाधिक स्मार्ट प्रीपेड मीटरों से संबंधित हैं। नए कनेक्शन धारकों के यहां लाइन खीचने से लेकर मीटर लगाने व मीटर को कंप्यूटर में फीड करने के नाम पर रुपया लिया जा रहा है।
शहर में लगाए गए स्मार्ट प्रीपेड मीटर से उपभोक्ता खासे परेशान हैं। खिन्नी नाका निवासी श्याम का कहना है कि उन्होंने घर पर नया बिजली का कनेक्शन कराया था। विभाग की ओर से उनके यहां स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाया गया है लेकिन चार माह बीत जाने के बाद भी बिल नहीं आया। बिजली विभाग के एसडीओ (शहर) का कहना कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने व कंप्यूटर में मीटर फीड करने का काम प्राइवेट एजेंसी का है। जो हमारी ही नहीं सुनते हैं।
खुटला के दीनू का कहना है कि कनेक्शन के लिए आवेदन किया तो दो माह बाद स्वीकृत हुआ। लाइन खीचने जो आए वह 500 रुपये ले गए। इसके बाद मीटर लगाने आए लोग 200 रुपये ले गए। अब मीटर को कंप्यूटर में फीड नहीं किया जा रहा है। जिससे बिजली का बिल नहीं निकल पा रहा है। रामभरोसे का कहना है कि उसके घर में पहले से कनेक्शन था। कुछ लोग आए और स्मार्ट मीटर लगा गए। तीन माह हो गए न मोबाइल पर बिल आया और न ही मैनुअल कोई बिल देने को तैयार है।
विभागीय अधिकारी से कहा जाता है तो वह कहते हैं कि हमसे कोई लेना देना नहीं है। यह सब काम ठेकेदारों के हाथों में है। यहीं नहीं जिनके मीटर फीड हो गए हैं उनके मोबाइल पर जो बिल की रकम आ रही है उसे देखकर लोगों को चक्कर आने लगता है। कटरा के रामसिया का कहना है कि उसके यहां तीन माह का बिल 14 हजार रुपये आया है। पहले यहीं बिल आठ से नौ हजार आता था। नुनिया मोहाल के सरजू का कहना है कि चार माह का बिल 21 हजार आया है।
पहले तो प्रति माह एक हजार से 1200 बिल आता था। ऐसे में तो सौर उर्जा प्लांट लगवाना ही एक मात्र विकल्प बचा है। अधीक्षण अभियंता आरके वर्मा का कहना है कि समीक्षा बैठक में सितंबर माह तक के मीटर फीड होने की बात कही गई। यदि यह बात गलत है तो संबंधित पर कार्रवाई की जाएगी।