चेक पोस्ट से गुजरते बालू भरे ट्रक।
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तिंदवारी/बांदा। प्रदेश की राजधानी लखनऊ को जाने वाले हाईवे पर थाने के नजदीक खनिज विभाग के चेकपोस्ट पर एंटी करप्शन टीम के छापे में धरे गए खनिज और पुलिस विभाग के आठ कर्मियों को लेकर लोगों में चर्चा है कि छोटी मछली तो फंस गईं, बड़ी की बारी कब आएगी? चतुर्थ श्रेणी और संविदा कर्मी पकड़े गए। विभागीय अफसर क्यों बचे?
चिल्ला में खनिज चेकपोस्ट मार्च से चल रहा था। यहां से बांदा जिले की सभी बालू खदानों के ट्रकों के अलावा महोबा से गिट्टी के ट्रक भी गुजरते हैं। इनकी संख्या रोजाना लगभग डेढ़ हजार के आसपास है। सूत्र बताते हैं कि चेकपोस्ट पर हर ट्रक के अलग रेट हैं।
10 चक्का ट्रक के 500 रुपये, 12 चक्का के 1000, 14 चक्का के 1500 रुपये और 16 चक्का के 2000 रुपये वसूले जाते थे। इसके अलावा जो ट्रक बिना रवन्ना के होते थे उनसे 5000 रुपये की वसूली होती थी। सूत्र बताते हैं कि बड़े ट्रांसपोर्टर रोजाना देने की बजाय इन चेकपोस्टों में हर माह एकमुश्त रकम जमा कर देते हैं। इन ट्रकों के नंबर चेकपोस्ट में दर्ज थे। उन्हें नहीं रोका-टोका जाता था।
गुरुवार को एंटी करप्शन टीम के छापे में चेकपोस्ट के छह कर्मियों और दो होमगार्ड पकड़े जाने तथा 6 लाख से ज्यादा कैश और बोलेरो आदि बरामद होने के बाद शुक्रवार को चेकपोस्ट पर सन्नाटा पसरा रहा। हालांकि बालू-गिट्टी के ट्रकों का आवागमन जारी रहा।
उधर, जिला खनिज अधिकारी शैलेंद्र मौर्या पहले ही चेकपोस्ट पर छापे की कार्रवाई से खुद को पूरी तरह अंजान और अलग बता चुके हैं। लोगों का कहना है कि अजब बात है कि खनिज विभाग के चेकपोस्ट पर महीनों से खुलेआम अवैध वसूली होती रही और विभाग व प्रशासन के अफसरों को इसका पता तक नहीं चला।