फोटो - 12 फोटो - मर्दन नाका में मतदाताओं को वोटर लिस्ट दिखाते बीएलओ। संवाद
बांदा । मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर गड़बड़ियों के आए दिन आरोप लगाने वाले राजनीतिक दल इस काम में खुद कितने गंभीर हैं। इसकी पोल बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) की नियुक्ति ने खोल दी है। इन दलों को या तो पर्याप्त संख्या में कार्यकर्ता ढूंढे नहीं मिले या इसमें दिलचस्पी नहीं दिखाई। प्रमुख दल कांग्रेस भी इस में शामिल हैं। बीएलए नियुक्त करने में वह भाजपा, सपा और बसपा से फिसड्डी साबित हुई है। वामपंथी दल सीपीएम और अपना दल (एस) तो एक भी बूथ पर अपना एजेंट नहीं बना पाए।
निर्वाचन आयोग ने एसआईआर में सहयोग और निगरानी के लिए सभी प्रमुख राजनीतिक दलों को हर एक बूथ में अपना एक-एक बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) नियुक्त करने का मौका दिया है। बांदा जनपद के चार विधान सभा क्षेत्रों में कुल 1518 बूथ हैं।
इनमें भाजपा, सपा और बसपा ने बराबर संख्या में 1395 बूथों पर अपने एजेंट नियुक्त किए हैं। एसआईआर को लेकर देशभर में गड़बड़ियों का शोर मचा रही कांग्रेस सिर्फ 1240 बूथों पर ही अपने एजेंट नियुक्त कर सकी। 155 बूथों पर उसे अपने कार्यकर्ता नहीं मिले या फिर लापरवाही बरती। अलबत्ता तिंदवारी क्षेत्र में कांग्रेस ने सभी दलों से ज्यादा 361 एजेंट बनाए हैं। यहां भाजपा, सपा और कांग्रेस ने 347 बूथों पर अपने एजेंट नियुक्त किए हैं।
बीएलए नियुक्ति में वामपंथी दल सीपीआई (एम) और अपना दल सबसे फिसड्डी रहे। 1970 के दशक के पूर्व तक बांदा जनपद में वामपंथी दलों का बोलबाला था। अब यह हासिए पर हैं। आम आदमी पार्टी (आप) सिर्फ 94 बूथों पर ही अपने एजेंट बना पाई है।
इनसेट -
क्षेत्र बूथ भाजपा सपा बसपा कांग्रेस
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बांदा -333 320 320 320 269
बबेरु - 391 354 354 354 267
नरैनी - 407 374 374 374 343
तिंदवारी-387 347 347 347 361