यूपी का चर्चित शीलू मामले की शुरुआत करीब 55 माह पहले हुई। इस दौरान इस मामले में कई उतार-चढ़ाव आए। शीलू ने कभी अच्छे दिन तो बुरे दिन का सामना भी किया, लेकिन उसका इरादा नहीं बदला। मीडिया के बाद सीबीसीआईडी और फिर सीबीआई के सक्रिय होने के बाद शीलू को न्याय मिला। कोर्ट का फैसला आने के बाद वह सभी का आभार जताते हुए कहती है कि जो उसके साथ हुआ, वह किसी दूसरी बेटी के साथ कभी न हो।
नरैनी क्षेत्र निवासी शीलू 22 अक्तूबर 2010 को पड़ोसी जनपद पन्ना (मध्य प्रदेश) के एक गांव में अपनी मौसी के घर गई थी। 27 अक्तूबर की रात धरमपुर थाने के एक सिपाही ने शीलू को उठा लिया। 3 नवंबर को शीलू के बाबा ने धरमपुर थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई।
पुलिस ने शीलू को बरामद कर आरोपी सिपाही अजय को लाइन हाजिर कर दिया और शीलू को उसके घर भेज दिया। शीलू अपने ननिहाल गई तो वहां से उसका फिर अपहरण हो गया। दिसंबर में उसे पथरा (बांदा) गांव के रज्जू के घर से बरामद किया गया।
शीलू को उसके पिता अतर्रा लाकर तत्कालीन बसपा विधायक पुरुषोत्तम नरेश द्विवेदी के यहां छोड़ दिया। 15 दिसंबर 2010 को विधायक के बेटे मयंक द्विवेदी ने अतर्रा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई कि शीलू उसके घर का सामान चुराकर भाग गई है। सामान में विधायक की राइफल भी शामिल थी। पुलिस ने अगले दिन शीलू को तुर्रा गांव के पास पकड़ने का दावा किया और 15 दिसंबर को देर शाम बांदा जेल भेज दिया।
शीलू के जेल जाते ही यह मामला तूल पकड़ गया। शीलू ने जेल में खुलासा किया कि अतर्रा में विधायक के घर उसके साथ गैंगरेप हुआ। शीलू ने विधायक पर भी रेप का आरोप लगाया। मामला तूल पकड़कर राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया।
तमाम दलों के नेता शीलू के पक्ष में खडे़ हो गए। इस बीच आरोपी विधायक पुरुषोत्तम नरेश ने मीडिया से कहा कि शीलू उनकी बेटी की तरह घर में रह रही थी। जेल में शीलू को लगातार कई दिन रक्तस्राव होता रहा। उसका इलाज किया गया। जेल में गुलाबी गैंग कमांडर संपत पाल, बांदा सदर के कांग्रेसी विधायक विवेक कुमार सिंह, सपा महासचिव विशंभर प्रसाद निषाद आदि शीलू से मिले।
इस बीच कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सूर्यप्रताप शाही भी शीलू से मिलने जेल पहुंचे तो उन्हें मिलने नहीं दिया गया। महिला आयोग की टीम ने भी शीलू से जेल में मुलाकात की। पहली जनवरी 2011 को तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने इस मामले में सीबीसीआईडी से जांच के आदेश दिए।
सीएम के फरमान के बाद सीबीसीआईडी ने तुरंत जांच शुरू कर दी। इस बीच बसपा ने विधायक पुरुषोत्तम नरेश द्विवेदी को पार्टी से निलंबित कर दिया। 13 जनवरी 2011 को हाईकोर्ट इलाहाबाद ने विधायक पुत्र द्वारा शीलू पर दर्ज कराया गया चोरी का मुकदमा खारिज कर दिया। इसके अगले दिन 14 जनवरी को पुलिस ने विधायक पुरुषोत्तम नरेश द्विवेदी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
कुछ ही घंटे बाद शीलू को जेल से रिहा कर दिया गया। सीबीसीआईडी ने विधायक के साथ इस मामले में रामनरेश उर्फ रावण, राजेंद्र शुक्ला, सुरेश नेता उर्फ रघुवंशमणि द्विवेदी को भी आरोपी नामजद किया। अप्रैल 2011 में अन्य आरोपी भी जेल भेज दिए गए।
विधायक समेत चारों आरोपियों की जमानत की अर्जियां बांदा की अदालत से खारिज हो गईं। बाद में राजेंद्र शुक्ला की जमानत अर्जी हाईकोर्ट से मंजूर हुई। वीरेंद्र गर्ग की जमानत अर्जी सीजेएम ने मंजूर कर दी। 12 सितंबर 2011 को सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई जांच के आदेश दिए।
इस बीच बांदा की अदालत में चल रहे इस मामले में लगभग 63 तारीखें पड़ीं। सीबीआई को जांच मिलने के बाद यह मामला लखनऊ में सीबीआई अदालत में चलता रहा। 30 नवंबर 2013 को आरोपी पूर्व विधायक पुरुषोत्तम नरेश द्विवेदी को हाईकोर्ट से जमानत मिल गई। जेल में रहने के दौरान ही विधायक के पिता का निधन हो गया था। अब 5 जून 2015 को सीबीआई की विशेष अदालत ने फैसला सुनाया।
‘अमर उजाला’ से फैसले की मिली खबर
‘मैं सो रही थी। तभी सुबह मेरे दोस्त का बबेरू से फोन आया। उन्होंने मुझे बताया कि ‘अमर उजाला’ में खबर छपी है कि आज मेरे मामले में सीबीआई कोर्ट फैसला सुनाएगी। मैं तुरंत उठी और नहाया। गांव के महेश्वरी मैया मंदिर गई और पूजा की। देवी से प्रार्थना की कि सब कुछ मेरे हित में हो। मेरे कहने पर दोस्त ने बबेरू में प्रसिद्ध मढ़ी दाई के मंदिर में नारियल तुड़वाया और दान किया। सीबीआई की जांच से मैं संतुष्ट हूं। पर सजा से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हूं। मेरे साथ बहुत जुल्म हुआ है। आरोपियों को आजीवन कैद होनी चाहिए थी।- शीलू
मीडिया की मदद से मिल सका है न्याय
नरैनी (बांदा)। आरोपियों को सजा के बाद शीलू ने कहा है कि उसकी सुरक्षा व्यवस्था अब और कड़ी होनी चाहिए। उसे आरोपी पूर्व विधायक के परिवार और अन्य अभियुक्तों के गुर्गों से खतरा है। कहा कि जिन दो अभियुक्तों को अदालत ने सजा नहीं दी है, उन्हें भगवान सजा देगा।
नम आंखों के बीच शीलू ने कहा कि उसे न्याय दिलाने में मीडिया का अहम रोल रहा। इस लड़ाई में मदद करने वालों में कांग्रेस अव्वल और सपा दूसरे नंबर पर रही। भाजपा ने भी मदद की। गैर राजनीतिक दलों में गुलाबी गैंग की संपत पाल के सहयोग पर आभार जताया। कहा कि कांग्रेस के विधायक विवेक कुमार सिंह ने उसका पूरा साथ दिया। राहुल गांधी भी उसके घर आए। सपा के विशंभर प्रसाद निषाद और भाजपा की स्मृति ईरानी और उमा भारती ने भी मदद की।