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‘वो किसान की लली, खेत-खलिहान को चली’

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बांदा में एक शादी समारोह में आए देशराज पटेरिया (हरी शर्ट में)। - फोटो : BANDA
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बांदा। ‘वो किसान की लली, खेत-खलिहान को चली’ जैसे दिलचस्प गीतों से बुंदेलियों का दिल जीतने वाले लोकगीतों के बेताज बादशाह पंडित देशराज पटेरिया ने कई बार बांदा के लोगों को अपने गीतों पर झुमाया था। उनके मुख से आल्हा सुनकर श्रोताओं की भुजाएं फड़क उठती थीं।
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बुंदेली लोकगीत गायक पंडित देशराज पटेरिया के आकस्मिक निधन पर उनके प्रशंसकों और श्रोताओं में शोक है। पटेरिया पहली बार 1981 में शहर के डिग्गी चौराहा पर बुंदेली लोकगीत कार्यक्रम में आए। इसके बाद कई साल इस कार्यक्रम में अपने गीतों से समां बांधा।
इसका आयोजन तत्कालीन समाजसेवी प्रभात कुमार श्रीवास्तव (पप्पू जी) करते थे। जल निगम के रिटायर्ड कर्मचारी जगदीश तिवारी बताते हैं कि उन्हें सुनने के लिए शहर से ज्यादा गांवों का हुजूम उमड़ता था। बांदा रोडवेज बस अड्डे पर जन्माष्टमी के आयोजन में भी पटेरिया ने अपने गीतों से समां बांधा। कार्यक्रम के आयोजक कंडक्टर रईस खां ने उन्हें आमंत्रित किया था।
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देशराज पटेरिया कई बार कालिंजर महोत्सव में भी आए। इनके अलावा गिरवां इंटर कालेज और जेपी शर्मा इंटर कालेज (बबेरू) में भी बुंदेली गीतों से लोगों को मंत्रमुग्ध किया था। जानकार बताते हैं कि शहर के जहीर क्लब और रामलीला मैदान में आयोजित कार्यक्रमों में भी वह शामिल हुए।
कांग्रेस नेता प्रद्युम्न कुमार दुबे लालू बताते हैं कि शहर के चित्रगुप्त मंदिर, कटरा में रेलवे अधिकारी सुरेंद्र निगम के पुत्र की शादी में भी शिरकत की थी। बांदा में कांग्रेस के तत्कालीन नेता मदन गोपाल द्विवेदी (दिवंगत) उनके रिश्तेदार थे। जानकारों के मुताबिक देशराज पटेरिया अंतिम बार ब्राह्मण सम्मेलन में शहर के आर्य कन्या इंटर कालेज में करीब सात वर्ष पूर्व आए थे। इसके बाद वह बांदा नहीं आ पाए।
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