बेंदाघाट। हौसला योजना 50 फीसदी गर्भवती महिलाओं और कुपोषित बच्चों का पेट नहीं भर पा रही। इसका ताजा उदाहरण तिंदवारी ब्लाक है। यहां 56 ग्राम पंचायतों में 175 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। इनमें 2,303 गर्भवती महिलाएं हैं। इनमें मात्र 1,089 गर्भवती महिलाओं को भोजन का बजट दिया गया है। बुधवार को योजना के उद्घाटन के दिन बड़ी संख्या में गर्भवती महिलाओं को शर्र्मिंदा होकर बैरंग लौटना पड़ा।
छापर गांव की पूजावती तीन माह की गर्भवती है। उसे गांव के प्राथमिक विद्यालय में बुलाया गया था। सूची में नाम था। लेकिन ऐन मौके पर यह कहकर वापस कर दिया गया कि जितनों को भोजन है, महिलाएं उससे अधिक आ गईं हैं।
इसी तरह बेंदा मजरा की आठ माह की गर्भवती पार्वती का कहना था कि उसे यह भी नहीं बताया गया कि उसका आंगनबाड़ी केंद्र कौन सा है। ऐसे में हौसला योजना क्या जाने ? इसी तरह पंडितों का डेरा की रहने वाली सात माह की गर्भवती पार्वती देवी कई आंगनबाड़ी केंद्रों से भटक कर मायूस लौट आई।
उसे कहीं भोजन नहीं मिला। उसका किसी भी आंगनबाड़ी केंद्र में नाम नहीं था। उधर, ग्राम प्रधान बेंदा हेमलता सिंह अपनी ग्राम पंचायतों के सभी सातों आंगनबाड़ी केंद्र 107 महिलाओं को खाना खिला रही हैं। जबकि सरकार से उन्हें सिर्फ 55 महिलाओं का बजट मिला है।