बांदा। जिले में मौरंग खनन के सात नए क्षेत्र विकसित करने की तैयारी है।
इनका सर्वे कराने के बाद आपत्तियां मांगी गईं और उनका निस्तारण कर फाइल राज्य स्तरीय पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण (एसईआईएए) को भेज दी गई है। प्राधिकरण की मंजूरी मिलने के बाद इन क्षेत्रों में खनन के लिए टेंडर और पर्यावरण प्रमाण पत्र की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
माना जा रहा है कि सभी औपचारिकताएं पूरी होने पर यहां खनन शुरू हो सकेगा। नए क्षेत्र जुड़ने से जिले में मौरंग खनन क्षेत्रों की संख्या 113 से बढ़कर 120 हो जाएगी। नदी की धारा बदलने या नदी क्षेत्र का विस्तार होने से कई बार नए खनन क्षेत्र विकसित हो जाते हैं। इनमें सरकारी भूमि के साथ निजी भूमि भी शामिल हो सकती है। इसी तरह विकसित हुए सात नए क्षेत्रों का सर्वे कराकर मंजूरी के लिए एसईआईएए को प्रस्ताव भेजा गया है।
इनमें लोहरा गांव में एक, कनवारा में दो, गाजीपुर में दो और बुधेरा में दो क्षेत्र शामिल हैं। गाजीपुर और बुधेरा के दोनों-दो क्षेत्र निजी भूमि से संबंधित हैं। इन क्षेत्रों में खनन की अनुमति मिलने के बाद टेंडर और पर्यावरण प्रमाण पत्र की प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी। इसके बाद ही खनन शुरू हो सकेगा।
नए खनन क्षेत्रों के विकसित होने से सरकार के राजस्व में इजाफा होने की संभावना है। हालांकि, खनन का दायरा बढ़ने के साथ निगरानी का भार भी बढ़ेगा। प्रभावी निगरानी नहीं होने पर अवैध खनन और इससे जुड़ी अन्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं। ऐसे में नए क्षेत्रों में खनन शुरू कराने के साथ अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण रखना भी विभाग के लिए चुनौती होगी। निगरानी में कमी रहने पर इन समस्याओं का निराकरण करना मुश्किल हो सकता है।
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आठ अन्य क्षेत्रों को भी किया चिह्नित
जिले में मौरंग खनन के लिए आठ अन्य संभावित क्षेत्रों को भी चिह्नित किया गया है। इनका सर्वे जल्द शुरू कराने की तैयारी है। इनमें कनवारा में दो, बेंदा में एक, सादी मदनपुर में एक, चरका में एक, बुधेरा और रिसोरा में एक-एक तथा नरी खादर में दो क्षेत्र शामिल हैं। इनकी सर्वे रिपोर्ट अभी तैयार की जानी है। इसके बाद रिपोर्ट के आधार पर आपत्तियां मांगीं जाएंगी और उनका निस्तारण होगा।
ऐसे में इन क्षेत्रों को खनन के लिए मंजूरी मिलने की प्रक्रिया में अभी लंबा समय लग सकता है। वर्तमान में जिले में मौरंग खनन के लिए 113 क्षेत्र चिह्नित हैं। इनमें से 65 क्षेत्रों की टेंडर प्रक्रिया कराई जा चुकी है। 24 क्षेत्रों में खनन हो रहा है, जबकि 24 अन्य क्षेत्रों में खनन की प्रक्रिया संचालित है। प्रस्तावित सात नए क्षेत्रों को मंजूरी मिलने और इनके जुड़ने के बाद जिले में खनन क्षेत्रों की संख्या 120 हो जाएगी।
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निजी भूमि पर खनन में मालिक को भी अधिकार
जिला खान अधिकारी राज रंजन कुमार ने बताया कि नदी की धारा बदलने से कई बार निजी भूमि भी नदी क्षेत्र में आ जाती है और वहां मौरंग जमा हो जाती है। यदि भूमि मालिक जमा मौरंग हटवाना चाहता है तो खनन विभाग की ओर से वहां नया खनन क्षेत्र विकसित करने की प्रक्रिया की जाती है।
अनुमति मिलने के बाद टेंडर कराया जाता है। भूमि मालिक चाहे तो टेंडर लेकर स्वयं खनन कर सकता है। यदि वह टेंडर नहीं लेना चाहता तो उसे टेंडर की कुल कीमत का 20 प्रतिशत प्रतिपूर्ति के रूप में दिया जाता है।
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वर्जन
सात नए खनन क्षेत्रों की सर्वे रिपोर्ट तैयार करने के बाद उस पर आपत्तियां ली गईं थीं। उनके निस्तारण के बाद राज्य स्तरीय पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण को फाइल भेजी थी। प्राधिकरण में भी सुनवाई हो चुकी है। जल्द ही नए खनन क्षेत्रों की मंजूरी मिलने की उम्मीद है।
-राज रंजन कुमार, जिला खान अधिकारी बांदा।