फोटो- 01 शहर के मोहल्ला कालूकुआं क्षेत्र में टैंकर से पानी भरते लोग। फाइल फोटो
- बांदा में केन नदी व चित्रकूट में यमुना में बनेगा इंटकवेल, जुलाई से कार्य शुरू किए जाने का दावा
- जल निगम ने तैयार की 600 करोड़ की वृहद कार्ययोजना
संवाद न्यूज एजेंसी
बांदा। अमृत योजना के तहत बांदा और चित्रकूट शहरों के नागरिकों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए जल निगम (शहर) ने एक महत्वाकांक्षी 600 करोड़ रुपये की जल परियोजना का प्रस्ताव तैयार किया है। इस प्रस्ताव को जल्द ही स्वीकृति के लिए शासन को भेजा जाएगा। जिम्मेदारों का कहना है कि सबकुछ ठीकठाक रहा तो जुलाई माह से काम शुरू हो जाएगा।
इस योजना का उद्देश्य दोनों जनपदों की बढ़ती जनसंख्या की पेयजल आवश्यकताओं को पूरा करना है, जिसमें वर्ष 2044 तक अनुमानित सात लाख की आबादी को लक्षित किया गया है। वर्तमान में, बांदा और चित्रकूट शहरों की संयुक्त जनसंख्या सवा तीन लाख के आसपास है।
मंडल मुख्यालय बांदा की वर्तमान आबादी लगभग 2.50 लाख है। जल निगम ने वर्ष 2044 तक चार लाख लोगों को शुद्ध पानी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 290 करोड़ रुपये की एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है। इस योजना के तहत, शहर से सटे ग्राम गंछा के पास एक नया वाटर ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किया जाएगा। केन नदी में एक इंटेकवेल का निर्माण किया जाएगा, जो पानी का मुख्य स्रोत होगा।
पेयजल भंडारण के लिए, 40 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रति दिन) क्षमता के पानी को स्टोर करने के लिए मौजूदा टैंकों की मरम्मत की जाएगी और साथ ही छह नए टैंकों का निर्माण किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, दो नए वाटर ट्रीटमेंट प्लांट भी स्थापित किए जाएंगे। शहर के 50 किलोमीटर के दायरे में नई पाइप लाइनें बिछाई जाएंगी, ताकि पानी का वितरण सुचारू रूप से हो सके।
चित्रकूट शहर के लिए जल परियोजना
जल निगम ने मंडल के चित्रकूट शहर में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए 300 करोड़ रुपये की एक अलग कार्ययोजना तैयार की है। चित्रकूट की वर्तमान आबादी लगभग 1.30 लाख है, और इस योजना का लक्ष्य वर्ष 2044 तक तीन लाख की संभावित जनसंख्या को पानी मुहैया कराना है।चित्रकूट के लिए राजापुर के पास यमुना नदी में एक इंटेकवेल और वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण प्रस्तावित है। 17 एमएलडी पानी के भंडारण के लिए, पुरानी टंकियों की मरम्मत के साथ-साथ पांच नए टैंकों का निर्माण किया जाएगा। इस क्षेत्र में 100 किलोमीटर के दायरे में पाइप लाइनें बिछाई जाएंगी और पुरानी पाइप लाइनों को बदला जाएगा ताकि लीकेज जैसी समस्याओं से बचा जा सके।
वाटर ट्रीटमेंट प्लांट को नहीं मिली जमीन
जल निगम को बांदा में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट को लगाने के लिए गंछा गांव के पास जमीन नहीं मिली है। हालांकि शहर के चारों ओर पानी की टंकी बनाने के लिए जमीन मिल गई। जल निगम का कहना है कि जमीन मिलने के बाद परियोजना में थोडा बहुत संशोधन होगा।
यहां पानी की टंकी को नहीं मिली जमीन
जल निगम को चित्रकूट के राजापुर में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बनाने के लिए जमीन मिल गई है। लेकिन अभी शहर में पानी की टंकी बनाने के लिए पांच में तीन ही स्थान पर जमीन मिली है। जल निगम का कहना है कि जिलाधिकारी के माध्यम से प्रयास किया जा रहा है।
यह होगा फायदा
यह परियोजना बांदा और चित्रकूट के नागरिकों के लिए एक बड़ी राहत साबित हो सकती है, बशर्ते कि भूमि अधिग्रहण और अन्य प्रशासनिक बाधाओं को समय पर दूर कर लिया जाए। इससे दोनों शहरों में पेयजल की गुणवत्ता और उपलब्धता में उल्लेखनीय सुधार होने की उम्मीद है।
वर्जन -
मंडल में बांदा और चित्रकूट शहरों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए एक वृहद कार्ययोजना तैयार की गई है, जिसे जल्द ही मंजूरी के लिए शासन को भेजा जाएगा। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि छोटे शहरों में अमृत योजना के तहत इस तरह के कार्य प्रगति पर हैं।- तपिश कुमार बालियान, जल निगम (शहरी) के अधिशासी अभियंता