बांदा। विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वितीय सत्यवीर सिंह की अदालत ने चेक बाउंस के एक मामले में नीरज राजपूत को दोषमुक्त कर दिया है।
यह फैसला परिवादी आलोक त्रिपाठी और विपक्षी नीरज राजपूत के बीच हुए समझौते के बाद आया है। आलोक त्रिपाठी ने अदालत में अपना वाद वापस लेने की अनुमति मांगी थी।
बांदा कोतवाली क्षेत्र के किले का पुरवा निवासी नीरज राजपूत पर शहर निवासी आलोक त्रिपाठी से 60 हजार रुपये उधार लेने का आरोप था। यह धनराशि नीरज ने अपनी मां के इलाज के लिए 12 फरवरी 2023 को ली थी। बैंक ने 4 अप्रैल 2024 को खाते में पर्याप्त धनराशि न होने के कारण चेक अनादरित कर दिया। आलोक ने 22 अप्रैल 2024 को नीरज राजपूत को कानूनी नोटिस भेजा था।
नोटिस का जवाब न मिलने और धनराशि अदा न होने पर आलोक त्रिपाठी ने धारा 138 परक्राम्य लिखित अधिनियम के तहत परिवाद दायर किया था। विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वितीय सत्यवीर सिंह ने सुलहनामे संबंधी प्रार्थना पत्र को स्वीकार किया गया। अदालत ने नीरज राजपूत को धारा 138 एनआईएक्ट के तहत दंडनीय अपराध से दोषमुक्त कर दिया गया।
छेड़छाड़ में तीन साल की सजा, जमानत
बांदा। बबेरू थाना क्षेत्र में नाबालिग से छेड़छाड़ और अभद्रता के मामले में एफटीसी जज श्रीपाल सिंह ने आरोपी को दोषी करार देते हुए तीन वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही 3,500 रुपये का अर्थदंड लगाया।
बबेरू थाने में वर्ष 2020 में मुकदमा दर्ज किया गया था। मामले में बनतलवा निवासी शिवा को आरोपी बनाया गया था। सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने शिवा को दोषी करार देते हुए तीन वर्ष के कारावास और 3,500 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। आरोपी को न्यायालय से जमानत दे दी गई। (ब्यूरो)