बारिश और ओलावृष्टि से फसल बर्बाद होने के सदमे मेें दो और किसानों की मौत हो गई। दोनों खेत से लौटकर घर पहुंचे कि हार्ट अटैक पड़ गया। एक किसान पर बैंक का तो दूसरे पर रिश्तेदारों और साहूकारों का कर्ज था। अच्छी फसल की आस टूटने का गम वे बर्दाश्त नहीं कर सके।
अतर्रा तहसील क्षेत्र के रामकिशुन त्रिवेदी का पुरवा (बल्लान) गांव निवासी किसान धर्मराज त्रिवेदी (40) पुत्र रामदेव की गुरुवार की शाम हार्टअटैक से मौत हो गई। पत्नी ऊषा ने बताया कि वे खेत से लौटकर आने के बाद इस बात की फिक्र कर रहे थे कि साल भर का खर्च कैसे चलेगा।
इसी बीच जिस्म से पसीना छूट गया और सांसें थम गईं। ऊषा के मुताबिक पति ने इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक की चौसड़ शाखा से दो लाख रुपये का कर्ज लिया था। मात्र 3 बीघा जमीन में हुई इस बार की पैदावार बारिश और ओलावृष्टि ने निगल ली। इससे वे परेशान थे। धर्मराज अपने पीछे चार बच्चे छोड़ गया है। इनमें दो लड़कियां शादी योग्य हैं। एक पुत्री और एक पुत्र नाबालिग हैं।
दूसरी घटना नरैनी तहसील के मुतियारी गांव की है। यहां शिवफल त्रिपाठी (47) पुत्र चुनूबाद गुरुवार की रात गेहूं की फसल की थ्रेसिंग करा रहे थे। छह बीघा जमीन में मात्र दो कुंतल गेहूं निकला था। वे अनाज को बैलगाड़ी में लादकर घर लाए और दरवाजे पर बैठकर कम फसल होने का अफसोस जताने लगे।
फुफेरे भाई संतोष के मुताबिक बातचीत के दौरान शिवफल छाती पर दर्द होने की बात कहते हुए लुढ़क गए। जब तक कोई कुछ समझ पाता, उनकी मौत हो गई। संतोष ने एसडीएम और कोतवाली पुलिस को सूचना दी। शुक्रवार की सुबह एसडीएम सुधीर कुमार मृतक के घर पहुंचे।
उन्होंने नियम के मुताबिक आर्थिक मदद दिलाने का आश्वासन दिया। परिवार के मुताबिक शिवफल ने पिछले साल रिश्तेदार और साहूकारों से 2 लाख रुपये कर्ज लेकर दो बेटियों की शादी निपटाई थी। वह कर्ज अभी अदा नहीं हो पाया है। कर्ज और फसल की चिंता ही शायद उन्हें ले डूबी।