अब कोई भी दिन ऐसा नहीं बीत रहा, जिस दिन किसान जान न गंवा रहे हों। पहले से बैंक के कर्ज से परेशान किसान ने अब फसल गंवा बैठने के गम मेें फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। उधर, एक किसान को राहत राशि का चेक नहीं मिला तो उसे सदमा लगा। हार्ट अटैक से उसकी मौत हो गई।
अतर्रा तहसील के महोतरा गांव में रविवार की शाम किसान अनिल (35) पुत्र शिवचरण ने कमरे में अपने अंगोछे से फंदा बनाकर फांसी लगा ली। काफी देर तक उसके कमरे से बाहर न निकलने पर घरवालों ने जाकर देखा तो उसका शव फांसी पर झूल रहा था।
सूचना पर पहुंची पुलिस दरवाजा तोड़कर अंदर दाखिल हुई और फंदे से शव उतारकर कब्जे में लिया। मृतक के बड़े भाई सुधीर ने बताया कि पांच भाइयों में बंटवारे के बाद अनिल को 12 बिस्वा जमीन मिली थी। इस बार उसने पूरे खेत में गेहूं बोया था, लेकिन ओला, बारिश में पूरी फसल बर्बाद हो गई।
बताया कि अनिल ने दस वर्ष पहले इलाहाबाद बैंक, चौसड़ गांव ब्रांच से एक लाख रुपये कर्ज लिया था। कुछ चुकाने के बाद पूरी अदायगी नहीं कर पाया। हाल में उस पर बैंक का ढाई लाख रुपये का कर्ज था। अनिल को इसकी चिंता सता रही थी। शनिवार को घर के अन्य लोग खेत में थे तभी अनिल फांसी पर झूल गया।
दूसरी घटना में अतर्रा क्षेत्र के सैमरिया जदीद (महुआ) गांव के किसान गोविंद प्रसाद अवस्थी की सदमे से मौत हो गई। भारतीय किसान यूनियन मंडल उपाध्यक्ष रघुवीर सिंह ने बताया कि गोविंद प्रसाद को राहत राशि का चेक नहीं मिला था। जबकि गांव के अन्य किसानों को मिल चुके हैं।
लेखपाल का कहना था कि अगली बार मिलेगा। इसी में गोविंद प्रसाद परेशान था। शनिवार की रात उसे सीने में दर्द उठा। रविवार को तड़के उसे कानपुर ले जाया गया। कानपुर में डॉ. मुरारी लाल चेस्ट चिकित्सालय में भर्ती किया गया। वहां सोमवार को दोपहर हार्टअटैक से मौत हो गई। किसान यूनियन ने 5 लाख रुपये मुआवजे की मांग की है।