फसल बर्बादी पर बुंदेलखंड में मंगलवार को चार और किसानों की मौत हो गई। इनमें दो किसानों ने आत्महत्या कर जीवन लीला समाप्त की। बांदा में सदर तहसील के पलरा गांव निवासी चुन्नू रैदास (70) पुत्र सुरजा ने सोमवार को पत्नी व पुत्र के साथ फसल की मड़ाई की थी।
मंगलवार को अरहर की कटाई करनी थी। सोमवार की रात वह मवेशी बाड़े में लेटा था। रात को उठकर अपने खेत गया और अपने ऊपर मिट्टी का तेल छिड़क कर आग लगा ली। सुबह ग्रामीणों ने खेत पर उसका जला हुआ शव देखा। पुत्र माता प्रसाद ने बताया कि साढ़े 7 बीघा जमीन है।
चना, मसूर और गेहूं बोया था। पैदावार कम होने से पिता तनाव में थे। इसी के चलते आत्महत्या कर ली। पैलानी के कुकुवाखास गांव निवासी छत्रपाल (35) पुत्र रामकिशोर निषाद पिता की इकलौती संतान था। वह पिता की दो बीघा जमीन के साथ लगभग 30 बीघा जमीन बटाई पर लिए था।
पिता रामकिशोर ने बताया कि सोमवार को साले की पुत्री की शादी थी। उसने साले से भी 25 हजार रुपये कर्ज ले रखा था। फसल बर्बाद होने और साले का कर्ज अदा न कर पाने से परेशान होकर उसने केन नदी पुल से कूदकर जान दे दी। पत्थरों से टकराकर उसकी वहीं मौत हो गई।
छलांग लगाने से पहले उसने अपनी साइकिल उठाकर नदी में फेंक दी थी। नाविकों ने पुलिस को सूचना दी। उधर, उप जिलाधिकारी पैलानी मनोज कुमार सिंह ने घटना की जानकारी से इन्कार किया। अतर्रा ग्रामीण क्षेत्र के जोधा का पुरवा निवासी रामखेलावन (40) पुत्र गिरिजा यादव ने 10 बीघा खेत बटाई पर लेकर गेहूं की बुवाई की थी।
मंगलवार को दोपहर उसने गेहूं की थ्रेसिंग कराई। अनाज कम देखकर उसे सदमा लगा। घर पहुंचने पर उसकी मौत हो गई। एसडीएम आरके श्रीवास्तव ने मृतक के परिवार को 10 हजार रुपये दिए हैं। इसी तरह मुड़िया का पुरवा में बच्ची (60) पुत्र बेंदा यादव ने अपनी 7 बीघा गेहूं की फसल काटने के बाद मंगलवार को मड़ाई कराई।
पैदावार की जो उम्मीद थी उससे आधा भी अनाज नहीं निकला। यह देख उसे गहरा सदमा लगा और घर पहुंचते ही मौत हो गई। उसने वर्ष 2007 में इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक ओरन से 50 हजार रुपये कर्ज लिया था। अब बढ़कर एक लाख से अधिक हो चुका था। एसडीएम ने जांच के बाद कार्रवाई की बात कही है।