बांदा में पोषक तत्वों की कमी दूर कर खेतों को उपजाऊ बनाने को जिले में 520 हेक्टेयर में ढैंचा की हरी खाद तैयार की जाएगी। इसका बीज किसानों को 50 फीसदी अनुदान पर मिलेगा। इसके प्रति किसानों का रुझान बढ़ाने को कृषि विभाग कवायद कर रहा है।
जिला कृषि अधिकारी डा. प्रमोद कुमार ने बताया कि ढैंचा का 200 क्विंटल बीज का आवंटन हुआ है। इसमें 80 क्विंटल बीज कृषि गोदामों में पहुंच गया है। बीज का मूल्य वैसे तो 54 रुपये प्रति किलो है, पर इसे 50 फीसदी अनुदान पर 27 रुपये की दर पर दिया जाएगा। एक हेक्टेयर में 40 किलो बीज बोया जाएगा।
फसल की रखवाली की जरूरत नहीं पड़ती। इसके पौधे मवेशी नहीं खाते। इसकी बुआई धान खेतों में 15 मई तक कर देनी चाहिए। बुआई के पहले एक बार खेत में पानी भर दें। इसमें ज्यादा पानी की जरूरत नहीं पड़ती। 45 दिन बाद जुताई कर इसे पलट दें। करीब 20 दिन तक सड़ने के बाद इसमें धान की रोपाई कर सकते हैं। इस हरी खाद से फसल में 25 फीसदी उपज अधिक होगी।