फोटो - 24 शहर की एक कोचिंग में अध्ययन करते छात्र। संवाद
बांदा। दर्जनों कोचिंग संस्थान बिना सुरक्षा व्यवस्था के चल रहे हैं। अधिकतर संस्थानों में छात्र-छात्राओं की सुरक्षा के कोई प्रबंध नहीं हैं। आग से बचने या दुर्घटना हो जाने पर इन संस्थानों के पास काेई भी इंतजाम नहीं हैं। कई जगह आग बुझाने के यंत्र तक नहीं हैं, जबकि कुछ संस्थानों में अग्निशमन यंत्रों में गैस रिफिल कराने की अवधि काफी समय पहले ही पूरी हो चुकी है। हालात यह हैं कि कई तरह की औपचारिकताओं को ठेंगा दिखाते हुए अधिकतर कोचिंग संस्थान चलाए जा रहे हैं।
जनपद में वर्ष 2022 से अभी तक मात्र 51 कोचिंग संस्थानों का पंजीकरण हुआ है। वहीं इसके सापेक्ष करीब तीन सौ से अधिक संस्थान संचालित किए जा रहे है। हद तो यह है कि कई कोचिंग संस्थान जिम्मेदार अधिकारियों के आसपास ही चल रहे है, लेकिन जिम्मेदार कभी भी वहां के हाल जानने का प्रयास नहीं करते। कई कोचिंग में छात्रों के बैठने तक की पर्याप्त जगह नहीं मिलती। जमीन पर बिठाकर छात्रों को अध्ययन कराया जाता है।
शौचालय, पेयजल की व्यवस्था तो दूर की बात है। शहर में बहुत से ऐसे संस्थान है, जिनके पास सही भवन और अग्निशमन यंत्र भी नहीं हैं। इस संस्थानों की जर्जर हालत को देखकर कभी भी हादसा होने का अंदाजा लगाया जा सकता है। इन संस्थानों में आपातकालीन समय में बाहर निकलने के लिए इमरजेंसी निकासी का भी कोई प्रबंध नहीं है। हादसों में प्रथम उपचार देने के लिए भी कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं।
मुख्यालय में बीते वर्ष कई बड़े कोचिंग संस्थान खुले हैं, लेकिन वहां के हालात भी कुछ खास नहीं हैं। इनमें न तो छात्रों की सुरक्षा के इंतजाम है और न ही वे मानक पूरे करते हैं। वहीं शिक्षा विभाग की माने तो इस वर्ष जनवरी से अभी तक शिकायत मिलने पर सिर्फ चार कोचिंग संस्थानों में निरीक्षण कर कार्रवाई की गई है।
वर्जन
जिले में संचालित कोचिंग संस्थानों का समय-समय पर निरीक्षण किया जाता है। कमियां मिलने पर कार्रवाई की जाती है। संस्थानों को निर्देश दिया गया है कि वह सुरक्षा मानकों का पूरा ध्यान रखें।
दिनेश कुमार, डीआईओएस