बांदा। अदालतों में वैज्ञानिक साक्ष्य पेश न कर पाने, पैरवी, सुबूतों की कमी और गवाहों के मुकर जाने इत्यादि से आरोपियों को सजा न मिल पाने पर चित्रकूटधाम मंडल के पुलिस महानिरीक्षक के.सत्यनारायणा ने रेंज स्तर पर गठित फोरेंसिक टीम, साइबर क्राइम पुलिस, डॉग स्क्वॉड टीम के प्रभारियों की गोष्ठी कर दिशा-निर्देश दिए।
पुलिस महानिरीक्षक ने कहा कि हरेक टीम के प्रत्येक सदस्य को वहीं काम सौंपा जाए, जिसमें वह दक्ष हो। फूट और फिंगर प्रिंट लेने का काम सिर्फ एक व्यक्ति को दिया जाए। टीम प्रभारियों को यह बखूबी पता होना चाहिए कि उनकी टीम का कौन सा सदस्य किस काम में माहिर है। समय-समय पर प्रशिक्षण और बैलिस्टिक कार्य भी कराया जाए।
कहा कि हत्या, लूट, बलात्कार, डकैती, हत्या का प्रयास, शस्त्र बरामदगी, मादक पदार्थ रिकवरी आदि मामलों में साक्ष्य जुटाने के लिए इन टीमों की खास भूमिका है। फोरेंसिक टीम का काम सबसे महत्वपूर्ण है। निर्देश दिया कि मंडल के जिलों में जहां भी अपराध से जुड़ी शस्त्र बरामदगी हो वहां फोरेंसिक टीम जाकर जांच रिपोर्ट तैयार करेगी।
हरेक घटनास्थल का एक फार्मेट तैयार करें, जिसमें यह दर्शाएं कि घटना में किस शस्त्र का प्रयोग हुआ है? बुलेट या इंट्री प्वाइंट और एग्जिट प्वाइंट जरूर देखें। सभी घटनाओं में घटनास्थल की कलेक्शन फाइल की इंट्री कंप्यूटर में होगी।
यह संबंधित पुलिस अधीक्षकों को भेजी जाएगी। महानिरीक्षक ने साइबर अपराधियों द्वारा अपनाए जाने वाले हथकंडों के उदाहरण समेत जानकारी दी। कहा कि फेसबुक पर धोखाधड़ी आजकल आम बात है। साइबर अपराधों की विवेचना के खास गुर भी बताए।