केन नदी की धारा में निर्मित देश के इकलौते जलीय दुर्ग रनगढ़ किले को अवैध खनन से पैदा हो रहे खतरे को लेकर मंडलायुक्त रामविशाल मिश्रा ने डीएम को निर्देश दिया है कि पुरातत्व और वन विभाग से जांच कराकर एक पखवारे के अंदर अपनी रिपोर्ट उन्हें भेजें।
नरैनी तहसील और गिरवां थाना क्षेत्र में केन नदी की जलधारा के बीच बहुत पुराना ऐतिहासिक दुर्ग स्थित है। इसे रनगढ़ किला कहते हैं। मंडलायुक्त ने डीएम को भेजे पत्र में कहा है कि ब्लास्टिंग करके पहाड़ को तोड़कर रास्ता बनाया गया है। दुर्ग के आसपास खनन किया जा रहा है। खनन करके आसपास की बालू निकालने से दुर्ग के धराशाई होने का खतरा है।
दो वर्ष पूर्व यहां अष्टधातु की मूर्ति पाई गई थी। जो खजुराहो में रखी है। आयुक्त ने कहा है कि पर्यावरण सुरक्षा की दृष्टि से प्रभागीय वनाधिकारी, क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के अधिकारियों से जांच कराएं। किसी भी दशा में किले को क्षति न पहुंचाई जाए।
डीएम डीपी गिरि ने अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) और खनिज अधिकारी को निर्देश दिए हैं कि संबंधित अधिकारियों से पत्राचार करके आख्या प्रस्तुत करें। उधर, रविवार को एडीएम गंगाराम गुप्ता ने अधिकारियों के साथ किले का निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि रनगढ़ किला खनन क्षेत्र से 800 मीटर दूर है। फिलहाल किले को कोई खतरा नहीं है।
18वीं सदी में चरखारी नरेश ने बनवाया था दुर्ग
बांदा। बुंदेलखंड में यूपी और एमपी की सरहद पर स्थित केन नदी की जलधारा में जलीय दुर्ग रनगढ़ किला 18वीं सदी में बनाया गया था। यह बांदा में गौरशिवपुर गांव के पास स्थित है। किले के निर्माण से संबंधित अभिलेखीय साक्ष्य तो नहीं मिलते लेकिन कुछ जानकार बताते हैं कि इसे चरखारी नरेश ने रिसौरा रियासत की रखवाली के लिए सैनिकों की सुरक्षा चौकी के रूप में बनवाया था।
बाद में यह किला पन्ना नरेश महराजा छत्रसाल के कब्जे में हो गया। करीब 4 एकड़ क्षेत्रफल में यह किला काफी ऊंचाई पर चट्टानों में बना हुआ है। तीन साल पूर्व किले के पास जलधारा से अष्टधातु की तोप बरामद हुई थी। इसे मध्य प्रदेश शासन ने अपने कब्जे में ले लिया। ब्यूरो