विवेकराज मिश्र
बांदा। समाज को झकझोर देने वाले क्रूरतम अपराध को अंजाम देने वाले दोषी सुनील ने कभी यह नहीं सोचा था कि उसे फांसी की सजा मुकर्रर की जाएगी। सोमवार दोपहर दो बजे उसे अदालत लाया गया।
दोषी शाम छह बजकर 15 मिनट से अधिक समय तक कटघरे में खड़ा रहा। साढ़े पांच बजे उसे सजा सुनाई गई तो वह दहाड़े मारकर रो पड़ा। बाद में गुमशुम हो गया। चिल्ला थाना क्षेत्र के एक गांव में तीन जून को शाम को दोषी 30 वर्षीय सुनील ने पड़ोस में घर के बाहर खेल रही तीन वर्षीय मासूम बच्ची से गुटखा मंगाया था। मासूम बच्ची गुटखा देने गई तो युवक ने उसे वहीं पर दबोच लिया और उसके साथ दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया था।
पुलिस ने मुठभेड़ करते हुए दोषी को दबोच लिया था। पुलिस ने बहुत तेजी दिखाई और चार्जशीट को न्यायालय में पेश की थी। सोमवार को उसे दोपहर दो बजे उसे अदालत लाया गय।
कटघरे में रहने के दौरान उसके चेहरे पर बेचैनी दिखाई दी। विशेष न्यायाधीश पाक्सो एक्ट प्रदीप कुमार मिश्रा की अदालत ने फांसी की सजा सुनाई। करीब साढ़े पांच बजे फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद दोषी सुनील दहाड़े मारकर रो पड़ा। थोड़ी देर रोने के बाद उसने अपने आंसू पोछे और गुमशुम हो गया। कटघरे में अकेले मौजूद सुनील कभी फर्श पर बैठ जाता तो कभी कटघरा पकड़कर खड़ा रहता।