फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सरिता बनेंगी बांदा जिला पंचायत अध्यक्ष

Mon, 12 Mar 2018 11:21 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, बांदा
विज्ञापन
जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए एडीएम को नामांकन पत्र सौंपती सरिता द्विवेदी। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

जिला पंचायत अध्यक्ष उप चुनाव में सपा, बसपा और कांग्रेस के हथियार डाल देने के बाद भाजपा ने यह महत्वपूर्ण सीट निर्विरोध हासिल कर ली है। भाजपा की सरिता द्विवेदी के मुकाबले कोई नामांकन न दाखिल होने से उनकी ताजपोशी का रास्ता साफ हो गया। औपचारिक घोषणा एक हफ्ते बाद 19 मार्च (सोमवार) को की जाएगी।

विज्ञापन


सोमवार को उप चुनाव में नामांकन पत्र दाखिल होने थे। कलक्ट्रेट परिसर में प्रशासन ने इसकी चौकस व्यवस्थाएं की थीं, लेकिन विपक्षी दलों के हाथ खड़े कर देने नामांकन प्रक्रिया बेहद खामोशी से चंद मिनट में खत्म हो गई। भाजपा के बांदा विधायक प्रकाश द्विवेदी की पत्नी और वार्ड 18 (महुआ) से जिला पंचायत सदस्य सरिता द्विवेदी ने इकलौता नामांकन पत्र सहायक निर्वाचन अधिकारी/एडीएम गंगाराम गुप्ता को तीन सेटों में सौंपा। उनके प्रस्ताव के रूप में जिला पंचायत सदस्य अरविंद, आशा और रामबाबू थे। अनुमोदक में जिला पंचायत सदस्य राजभवन, गीता सिंह और सुखदेव प्रसाद रहे। नामांकन के लिए निर्धारित समय तीन बजे तक कोई दूसरा पर्चा दाखिल नहीं हुआ।

दोपहर करीब 2:30 बजे भाजपा नेताओं का लाव-लश्कर कलक्ट्रेट परिसर पहुंचा। नामांकन दाखिल करने के मौके पर विधायक प्रकाश द्विवेदी, नरैनी विधायक राजकरन कबीर, भाजपा जिलाध्यक्ष इंद्रपाल सिंह पटेल, पूर्व जिलाध्यक्ष बालमुकुंद शुक्ल, संतोष गुप्ता, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष महेंद्र सिंह वर्मा, रामकरन सिंह बच्चन, शिवशरण सिंह, रमेश साहू, आरबी सिंह यादव, पुष्कर द्विवेदी, जिला पंचायत सदस्य मीना भारती, अंजना सिंह, आराधना यादव, खैरुनिशां, राजेश शिवहरे, जितवा प्रसाद भी शामिल रहे।
विज्ञापन


भाजपा के आगे सपा, बसपा और कांग्रेस ने टेके घुटने
बांदा। जिला पंचायत की राजनीति में भाजपा के आगे सपा, बसपा और कांग्रेस ने घुटने टेक दिए। बड़ी-बड़ी बातें और भाजपा को आए दिन कोसने वाले इन दलों ने जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी बहुत खामोशी से सिर झुका कर भाजपा को सौंप दी। चुनाव में सामना तो दूर की बात नामांकन करने तक ही हिम्मत नहीं जुटाई। तीनों विपक्षी दलों के सदस्य भाजपा के नामांकन में शामिल भी रहे।

भाजपा ने सपा की जिला पंचायत अध्यक्ष निर्मला सिंह को अविश्वास प्रस्ताव में पराजित कराने के बाद कुर्सी पर कब्जे के लिए जुगत भिड़ानी शुरू कर दी थी। अध्यक्ष की सीट महिला के लिए आरक्षित है। निर्मला सिंह के हटने के बाद यह चर्चा थी कि पूर्व अध्यक्ष महेंद्र सिंह वर्मा की पत्नी आशा वर्मा की ताजपोशी की जाएगी, लेकिन भाजपा में अपनी तगड़ी पकड़ और पैठ बना चुके विधायक प्रकाश द्विवेदी ने ऐन मौके पर दांव खेलकर महेंद्र के मंसूबों पर पानी फेर दिया। ठीक नामांकन के दिन (12 मार्च, सोमवार को सुबह) को भाजपा के कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्रीय अध्यक्ष मानवेंद्र सिंह प्रदेशाध्यक्ष महेंद्रनाथ पांडेय के निर्देशों का हवाला देकर जारी किए पत्र में जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए सरिता द्विवेदी को भाजपा का अधिकृत प्रत्याशी घोषित कर दिया।

कुछ ही घंटे बाद सरिता ने नामांकन पत्र दाखिल कर दिया। एक दिन पूर्व यानी रविवार को अध्यक्ष के लिए चार नामांकन पत्र खरीदे गए गए थे। इनमें भाजपा की सरिता द्विवेदी सहित पूर्व अध्यक्ष बल्देव प्रसाद वर्मा ने अपनी पत्नी कैलशिया देवी के लिए पर्चा खरीदा था। इसके अलावा गीता सिंह और आशा देवी ने भी पर्चे लिए थे। ऐसे में लग रहा था कि भाजपा प्रत्याशी को टक्कर देने के लिए कई प्रतिद्वंद्वी सामने आएंगे, लेकिन रात भर में नजारा बदल गया।

राजनीति की गोटें ऐेसी फिट हुईं कि सरिता के अलावा अन्य तीनों नामांकन पत्र खरीदने वालों ने दाखिल करने से हाथ खड़े कर दिए। यहां तक कि अपने लिए पर्चा खरीदने वाली गीता सिंह सरिता द्विवेदी के नामांकन की अनुमोदक बन गईं। सरिता के नामांकन में भाजपा नेताओं के लश्कर में सपा, बसपा, कांग्रेस समर्थक सदस्य भी शामिल हो गए। सभी मीडिया से कुछ भी कहने से कतराते रहे।

परिवार को टिकट न देने का फरमान धड़ाम
बांदा। जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में भाजपा हाईकमान का वह हुक्म धराशाई हो गया, जिसमें कहा गया था कि निर्वाचित जनप्रतिनिधि अपने किसी परिवार के सदस्य को टिकट न दिलाएं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुछ माह पूर्व इलाहाबाद में आयोजित कार्यकर्ताओं के सम्मेलन में यही बात कही थी। इसके पहले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने भी यही एलान किया था।

बहुत कम अरसे में भाजपा में अपनी खास पकड़ बनाकर प्रकाश द्विवेदी विधायक के मुकाम तक पहुंच गए। अभी भी उनकी पार्टी में पैठ बढ़ाने का सफर जारी है। खासतौर पर जिला पंचायत की राजनीति में भाजपा के दिग्गजों को लगातार मात दे रहे हैं। पहले अपनी पत्नी को जिला पंचायत का चुनाव जितवाया और अब निर्विरोध अध्यक्ष बनवाने की बाजी जीत ली। उधर, पार्टी के ही लोगों में गुपचुप यह चर्चा रही कि प्रधानमंत्री और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के निर्देश यहां बेअसर रहे।

13 साल बाद जिला पंचायत में खिला कमल
बांदा। जिला पंचायत की राजनीति में पिछले करीब 13 साल के बाद भगवा की वापसी और कमल खिला। वर्ष 2005 में भाजपा की कृष्णा पटेल जिला पंचायत अध्यक्ष हुईं थीं। उसके बाद भाजपा की बारी नहीं आई। बसपा और सपा ही कुर्सी पर काबिज रही। केंद्र और राज्य में भाजपा के सत्तानशीं होने के बाद यहां भाजपा ने पहले अविश्वास प्रस्ताव के दांव से सपा की अध्यक्ष को चित किया और अब दूसरे दांव में निर्विरोध अध्यक्ष की सीट हासिल कर ली।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें