ग्रामीण बैंकों की देशव्यापी हड़ताल का यहां भी व्यापक असर रहा। इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक की ब्रांचों में ताले पड़े रहे। बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों ने प्रधान कार्यालय के सामने प्रदर्शन कर नारे लगाए। बैंक कर्मचारियों की छह सूत्रीय मांगें हैं। बुंदेलखंड की प्रमुख इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक की 11 जिलों में स्थित 652 ब्रांचों में ज्यादातर हड़ताल के कारण बंद रहीं।
इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक आफीसर्स एसोसिएशन ने एक दिवसीय हड़ताल की घोषणा की थी। बैंक की लगभग सभी शाखाओं मेें ताले नहीं खुले। एसोसिएशन के महामंत्री पीडी सागर ने बताया कि इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक की बुंदेलखंड समेत 11 जिलों में स्थित शाखाओं में हड़ताल के चलते लगभग 12 करोड़ का लेन-देन ठप रहा।
इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक आर्गनाइजेशन हड़ताल में शामिल नहीं हुआ। इससे बांदा के कनवारा गांव की ब्रांच मेें हड़ताल का असर नहीं दिखा। मुख्य मांगों में ग्रामीण बैंकें के निजीकरण को रद करने, बैंकिंग पेंशन नीति 1995 को प्रथम आप्शन के नियमों के तहत ग्रामीण बैंकों में शीघ्र लागू करने, मित्रा कमेटी की रिपोर्ट रद करने, दैनिक और अस्थाई कर्मचारियों की सेवा शर्तों में सुधार और उनका नियमितीकरण, बैंक बोर्ड मेें कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व आदि मांगें शामिल हैं।
सिविल लाइन स्थित प्रधान कार्यालय में हड़ताली अधिकारियों और कर्मचारियों ने एकजुट होकर नारे लगाए और सभा की। इस दौरान यूनियन नेता महेंद्र सिंह, धीरेंद्र सिंह, आशीष त्रिपाठी, अरुण यादव, आरएस परमार, उमाकांत अवस्थी, दुलीचंद्र, रमेश मिश्रा, हरेंद्र सिंह, सुरेश जैन, उदयभान वर्मा, वीबी त्रिपाठी, अंकित यादव, प्रधान कार्यालय के पुरुषोत्तम सिंह परिहार आदि मौजूद रहे।