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सूखा राहत पैकेट के सड़े आलू फेंकवाये

Fri, 15 Jul 2016 11:34 PM IST
ब्यूरो अमर उजाला, बांदा
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घटिया आलू भरे ट्रक और ट्रैक्टर ट्राली रुकवाकर गांव के बाहर फेंकने का निर्देश देते एसडीएम एके पुष्कर। - फोटो : अमर उजाला
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अतर्रा। समाजवादी सूखा राहत पैकेट में बांटे जा रहे सड़े आलू खाकर गरीबों के बीमार पड़ने की खबर ‘अमर उजाला’ में छपने के बाद प्रशासन की नींद टूटी। एसडीएम ने शुक्रवार को लेखपाल और कोटेदारों को सड़ा आलू फेंकने के निर्देश दिए। साथ ही ठेकेदार को घटिया सामग्री आपूर्ति करने से बाज आने की चेतावनी दी।
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समाजवादी सूखा राहत पैकेट में अंत्योदय कार्डधारकों को 25-25 किलो आलू भी मुफ्त बांटे जा रहे हैं। बंटने के लिए आए आलू सड़े होने से तहसील परिसर में ही दुर्गंध आ रही थी। यही सड़ा आलू प्रशासन ने गरीबों में बंटवा दिया।

सड़ा आलू खाकर बृहस्पतिवार को आसपास के गांवों के लगभग सौ लोग बीमार हो गए थे। उनका सीएचसी में इलाज कराया गया। ‘अमर उजाला’ में शुक्रवार को खबर प्रकाशित होने के बाद एसडीएम एके पुष्कर ने ट्रकों में लदे आलू को कोटेदारों तक पहुंचाने से पहले ही गांव के बाहर रोककर जांच की। साथ ही खराब आलू गांव के बाहर फेंकने को कोटेदारों और लेखपालों को निर्देश दिए।
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नोडल अधिकारी नायब तहसीलदार संजय अग्रहरि ने बताया कि आलू सप्लाई करने वाले ठेकेदार को भी चेतावनी दी गई है। पुराना और सड़ा आलू आया तो नहीं लिया जाएगा। सड़े आलू की दुर्गंध दूर करने के लिए शुक्रवार को तहसील परिसर की कर्मचारियों ने धुलाई और सफाई की।

उधर, सड़ा आलू खाकर बीमार लोगों की हालत में सुधार होने पर देर रात सीएचसी से छुट्टी दे दी गई। बीमारों में शामिल अतर्रा ग्रामीण के शिवशरण ने बताया कि चार दिन पहले राहत पैकेट के साथ आलू मिले थे। इनमें अधिकांश खराब थे।

जिस आलू का कुछ भाग ठीक था, उसे काटकर पका लिया, शेष फेंक दिए। पकाए आलू खाने के बाद ही बीमार पड़ गए। चौरिहन पुरवा की लक्ष्मी ने बताया कि ज्यादातर आलू खराब और सड़े हैं। आलू खाने से बीमार प्राइवेट अस्पतालों में भर्ती राजाभइया (35), रामराजा (35), राजकरन (40), रामप्रसाद (38), फूलचंद्र (40) निवासीगण अतर्रा ग्रामीण ने कहा कि जितने का राहत पैकेट नहीं, उससे ज्यादा पैसे इलाज में खर्च हो गए। समाजवादी राहत पैकेट आफत बन गया।
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