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धक्के खाकर खाली हाथ लौटे खाताधारक

Wed, 23 Nov 2016 10:55 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, बांदा
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बैंक आफ बड़ौदा में लाइन में खड़े लोग। - फोटो : अमर उजाला
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बांदा। बेटियों के हाथ पीले करने में रुकावट बने ‘नोट’ के लिए परिजन बैंकों में धक्के खाते रहे। कई बैंकों में कैश खत्म होने पर तमाम लोगों को बैरंग लौटना पड़ा। नोटबंदी के 15वें दिन बाद भी बैंकों और एटीएम में लंबी लाइनें लगी रहीं। युवाओं के हुड़दंग और धक्का-मुक्की से लाइन में लगे वृद्धों की हालत खराब रही। बैंककर्मियों और पुलिस से उपभोक्ताओं की झड़पों के नजारे आम रहीं। पुराने नोटों का चलन बंद होने का सबसे ज्यादा असर शादी वाले परिवारों पर पड़ा है। शादी वालों को ढाई लाख रुपये देने का ऐलान के बाद भी यहां बैंकों में अमल नहीं हो रहा। लोग जिलाधिकारी और उप जिलाधिकारी की ड्योढ़ी में भटक रहे हैं। बुधवार को जिलाधिकारी से मिलने आई सुमन कुमारी (शास्त्री नगर) ने बताया कि बेटी प्रीति की शादी 30 नवंबर को है। नए नोट न होने से तैयारियां रुकी हैं।
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भारतीय स्टेट बैंक, कचहरी शाखा में उसके पति का खाता है। बैंक से ढाई लाख रुपये नहीं मिल रहे। दुरेड़ी गांव का रामआसरे प्रार्थना पत्र में डीएम से हस्ताक्षर कराने आया था। बताया कि 4 दिसंबर को उसकी पुत्री विनीता की शादी है। बैंक गया तो मजिस्ट्रेट के हस्ताक्षर कराकर लाने की बात कहकर लौटा दिया। उधर, बैंक आफ इंडिया (पद्माकर चौराहा), एसबीआई शाखा अलीगंज व रामलीला रोड, बैंक आफ बड़ौदा कोतवाली रोड व कालूकुआं, यूनियन बैंक व पंजाब नेशनल बैंक (छावनी), इलाहाबाद बैंक गूलरनाका व बिजलीखेड़ा, एचडीएफसी व एक्सिस बैंक (अमर टाकीज तिराहा) में पुराने नोट बदलने वालों की लंबी लाइनें लगी रहीं। कई बैंकों की लाइन में वृद्ध भी घंटों बारी का इंतजार करते रहे। युवाओं की धक्का-मुक्की और हो-हल्ला से लोग परेशान रहे। एसबीआई व एचडीएफसी के एटीएम के अलावा अन्य बैंकों के एटीएम नहीं चले।
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