बांदा। एमबीबीएस छात्रा ऊषा भार्गव के खुदकुशी प्रकरण से सहपाठी छात्रा रंजना, निकिता और आस्था खासी व्यथित हैं। तीनों छात्राओं ने बुधवार से खाना भी नहीं खाया। रह-रहकर ऊषा को यादकर आंसू बहाने लगतीं हैं। उनकी हालत देख अन्य सीनियर और सहपाठी छात्राएं उन्हें संभालने में लगी हैं। ऊषा के पिता प्रभुराम भार्गव के गले से लगकर वह रोने लगीं। पिता के आंसू छलक पड़े तो छात्राओं ने उन्हें संभाला।
छात्रा रंजना ने बताया कि वह भी राजस्थान की है। ऊषा और उसका चयन एक साथ हुआ था। कभी-कभी वह घर से ट्रेन द्वारा एक साथ बांदा मेडिकल कॉलेज आया-जाया करतीं थीं। जुलाई माह में जब ऊषा अपने घर राजस्थान गई थी तो वह भी उसके साथ गई थी। ऊषा उससे 15 दिन पहले मेडिकल कॉलेज आ गई थी। वह 15 दिन बाद आई थी।
रंजना ने बताया कि घटना से दो दिन पहले ऊषा ने नींद न आने की शिकायत बताई थी। उसने नींद की गोली भी मांगी थी। उसने नहीं दी थी। लेकिन उसने किसी तरह की कोई परेशानी उससे शेयर नहीं की थी। भावुक स्वभाव की ऊषा पढ़ने में ठीक थी। ऑल इंडिया में उसकी रैंकिंग अच्छी आई थी। बुधवार को सुबह उसने उसके साथ मेस में नाश्ता भी किया था। फिर अपने रूम चली गई थी। तीन साल उसने ऐसी कोई बात शेयर नहीं की जिससे उसकी खुदकुशी की वजह पता चल सके। उधर, निकिता ने भी बताया कि ऊषा से ऐसी उम्मीद नहीं थी। कुछ तो शेयर करती। यह सहेलियां ऊषा के पिता से लिपटकर रोती भी रहीं।
चेहरा देखने पर प्राचार्य ने किया मना
बांदा। पोस्टमार्टम हाउस में एमबीबीएस तृतीय वर्ष के छात्र और छात्राएं गमगीन हालत में मौजूद रहे। पोस्टमार्टम के बाद जैसे ही शव को एंबुलेंस में रखवाया जाने लगा तो एमबीबीएस के छात्रों ने प्रधानाचार्य से ऊषा का आखिरी चेहरा देखने की फरियाद की। प्रधानाचार्य के मना करने पर छात्रों ने प्रधानाचार्य को सॉरी बोला और चुपचाप खड़े हाे गए।
मेडिकल छात्रों ने नहीं अटेंड की कक्षाएं
बांदा। गुरुवार को एमबीबीएस तृतीय वर्ष के छात्रों ने थ्योरी और प्रैक्टिकल की कक्षाएं अटेंड नहीं की। वह पूरे समय पोस्टमार्टम में रहे। गमगीन माहौल में सिर्फ छात्रा ऊषा के विषय में आपस बात करते दिखे। पूछने पर बस इतना ही जवाब दिए कि पढ़ाई में अच्छी थी। मेडिकल छात्र छात्रावास से मृतक छात्रा के सामान को पैक कराने में भी मदद की। छात्रा का सभी सामान उन्होंने खुद एंबुलेंस में रखाया। ऊषा के पिता के गले लगकर उन्हें सांत्वना दी।