फोटो - 05 केन नदी के बीच बना किला। स्त्रोत : पयर्टन विभाग
बांदा। ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण और उन्हें पर्यटन के मानचित्र पर स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम प्रदेश सरकार उठा रही है। इसी कड़ी में बांदा के नरैनी तहसील क्षेत्र में केन नदी के बीच स्थित ऐतिहासिक रनगढ़ के किले का सुंदरीकरण और एक भव्य रिवर फ्रंट विकसित किया जा रहा है। इस परियोजना पर लगभग 5.81 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इसके पूरा होने के बाद किले के एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में उभरने की उम्मीद है।
रनगढ़ का किला जिसे जलीय दुर्ग के नाम से भी जाना जाता है। 18वीं सदी में महोबा के चरखारी नरेश द्वारा रिसौरा रियासत की रक्षा के लिए बनवाया गया था। केन नदी के मध्य में स्थित होने के कारण इसकी बनावट इसे एक अनूठा चरित्र प्रदान करती है। यह किला अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण कभी डकैतों की शरणस्थली भी रहा है। क्योंकि नदी के बीच होने के कारण यहां पहुंचना आम लोगों के लिए अत्यंत कठिन था।
वर्तमान में इस ऐतिहासिक किले में 5.81 करोड़ रुपये की लागत से रिवर फ्रंट का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। इस परियोजना के तहत आकर्षक घाटों का निर्माण, लाइटिंग की व्यवस्था और किले तक बेहतर पहुंच के लिए मार्ग बनाए जा रहे हैं। इसके अलावा, किले के समग्र सौंदर्यीकरण पर भी ध्यान केंद्रित किया जा रहा है, ताकि यह आने वाले समय में पर्यटकों को आकर्षित कर सके।
जिला अर्थ एवं सांख्यिकी अधिकारी पुष्पेंद्र कुमार ने बताया कि रनगढ़ का किला एक ऐतिहासिक धरोहर है और योगी सरकार ने इसे संरक्षित कर पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने का सराहनीय निर्णय लिया है। पिछली सरकारों द्वारा ऐतिहासिक धरोहरों की उपेक्षा के विपरीत, वर्तमान सरकार इन महत्वपूर्ण स्थलों के संरक्षण और विकास पर विशेष ध्यान दे रही है। रिवर फ्रंट के निर्माण से न केवल किले की सुंदरता बढ़ेगी, बल्कि यह क्षेत्र के पर्यटन को भी नई गति प्रदान करेगा।
परियोजना के तहत रिवर फ्रंट का लगभग 45 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है और शेष कार्य भी जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा। पर्यटन विभाग इस परियोजना की देखरेख कर रहा है। एक बार यह कार्य पूरा हो जाने के बाद, रनगढ़ का किला पर्यटकों के लिए एक प्रमुख आकर्षण का केंद्र बनेगा। जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी लाभ मिलने की संभावना है।