बांदा। राष्ट्रीय भर्ती एजेंसी (एनआरए) के गठन की मंजूरी प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े युवक-युवतियों के लिए नया आयाम साबित होगा। इस भर्ती प्रक्रिया के दूरगामी परिणाम क्या होंगे? यह भविष्य तय करेगा। कुछ प्रतियोगी छात्र इसे हितकर मान रहे हैं तो कुछ मेरिट लिस्ट की समय सीमा से नाखुश नजर आए।
एजेंसी अब रेलवे, कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी), बैंकों के समूह-बी और सी (गैर तकनीकी) पदों के लिए समान पात्रता परीक्षा (सीईटी) कराएगी। सीईटी उत्तीर्ण परीक्षार्थियों की मेरिट लिस्ट तीन साल के लिए मान्य होगी। पेश है एक एजेंसी-एक परीक्षा के संबंध में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवक-युवतियों से बातचीत।
तकनीकी ग्रुप को नहीं किया शामिल
शहर के छोटी बाजार की साक्षी सिंह ने बताया कि वह सिविल इंजीनियरिंग की तैयारी कर रही है। सरकार ने एक एजेंसी-एक परीक्षा में तकनीकी ग्रुप को शामिल नहीं किया गया है। इसे भी शामिल किया जाना चाहिए। फिर भी प्रतियोगी परीक्षार्थियों के लिए कैबिनेट का यह निर्णय बेहतर है। इसके दूरगामी परिणाम होंगे।
शुल्क बचेगा, भागदौड़ से निजात मिलेगी
बलखंडीनाका की सृष्टि सैनी का कहना है कि वह बैकिंग की तैयारी कर रही हैं। कैबिनेट के फैसले से खुश हैं। बैंकों के समूह बी और समूह सी के लिए उन्हें शहर के बाहर सेंटरों में परीक्षा देने जाना नहीं पड़ेगा। अभी तक अलग-अलग परीक्षाओं के लिए अलग-अलग शुल्क जमा करना पड़ता था। इससे निजात मिलेगी।
नई व्यवस्था से फायदा-नुकसान दोनों
कालूकुआं के सुमित शुक्ला ने बताया कि एसएससी और रेलवे भर्ती परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। नए नियम से फायदा और नुकसान दोनों है। फायदा यह है कि एक ही परीक्षा देनी पड़ेगी, लेकिन नुकसान यह है कि तीन साल की मेरिट लिस्ट में आने के लिए इंतजार करना पड़ेगा। मेरिट भी हाई जाएगी। अब तैयारी भी अधिक करनी होगी।
मेरिट लिस्ट की समय सीमा ज्यादा
आंबेडकर नगर के विपनेश कुमार ने बताया कि वह पीसीएस की तैयारी कर रहे हैं। बताया कि केंद्र सरकार यह फैसला हितकर है पर सीईटी की मेरिट लिस्ट तीन साल के लिए मान्य किया जाना व्यवहारिक नहीं है। मान लीजिए तीन साल तक कोई भर्ती नहीं निकली तो प्रतियोगी छात्र सिर्फ इंतजार करेंगे। उनका सेलेक्शन नहीं हो पाएगा।
सृष्टि सैनी।- फोटो : BANDA
सुमित शुक्ला।- फोटो : BANDA
ब्रजनेश कुमार।- फोटो : BANDA