बांदा। जल शक्ति राज्यमंत्री का बिजली विभाग के अधिकारियों पर त्योरी चढ़ना लगातार मिल रही शिकायतों का परिणाम रहा। नलकूप कनेक्शन के इच्छुक किसानों को यहां हर पग पर लूटा जा रहा है। उन्हें डिवीजन कार्यालय से लेकर स्टोर तक जगह-जगह चढ़ावा देने के बाद ही सामग्री मिल पाती है।
नलकूप कनेक्शन का बजट तो करीब एक लाख चार हजार रुपये, पर उन्हें अपने खेत तक सामग्री पहुंचाने में करीब डेढ़ लाख रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं। कनेक्शन की सारी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद भी बिना दस हजार रुपये दिए सामग्री नहीं लोड होती।
बिजली विभाग के मुख्य अभियंता आरिफ अहमद के कार्यालय में बुधवार की रात विवाद हुआ और मामले ने तूल पकड़ा, उसके पीछे वजह यही रही। किसान महीनों से चक्कर लगा रहे हैं और उन्हें नलकूप कनेक्शन सामग्री न मिलने पर राज्यमंत्री का गुस्सा भड़का। दरअसल बिजली विभाग के कार्यालयों में दलाल सक्रिय हैं। इनके दखल के बिना किसानों का काम ही नहीं होता है।
अमर उजाला की टीम ने शुक्रवार को बिजली विभाग के स्टोर में पड़ताल की तो किसानों ने पीड़ा जाहिर की। बघेला बारी गांव से आए एक किसान ने बताया कि आवेदन करने के साथ ही चढ़ावा देना पड़ता है। पांच हजार रुपये दिए बिना सर्वे नहीं होता और न ही स्टीमेट बनता। इसके बाद जब स्टीमेट का पैसा जमा होता है तो रसीद 1.04 लाख रुपये की दी जाती है, जबकि रुपये 1.21 लाख जमा कराए जाते हैं। फिर सामग्री के लिए महीनों नंबर लगाना पड़ता है। स्टोर में एईओ व भंडारी तथा किसान के बीच दलाल सक्रिय होते हैं। दस से 15 हजार रुपये देने पर तुरंत नबंर आ जाता है। पैसे न देने पर दौड़ लगानी पड़ती है। सामग्री मिली तो लोडिंग के नाम पर एक हजार रुपये देना होता है। इस तरह 1.04 लाख की रसीद और खेत तक सामग्री पहुंचने में डेढ़ लाख रुपये खर्च हो जाते हैं।