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गिने-चुने नमाजियों ने मस्जिदों में अदा की जुमे की पहली नमाज

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बांदा में शेख साहब की सरवर साहब की मस्जिद। - फोटो : BANDA
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बांदा में रमजान माह के 7वें रोजे को पहले जुमे की नमाज अदा की गई। यह पहला मौका था जब रमजान जैसे पवित्र महीने के जुमा पर मस्जिदें नमाजियों से लबरेज नहीं हुई। लॉकडाउन की शर्तों के मुताबिक गिने-चुने लोगों ने मस्जिदों में जुमा की नमाज अदा की। ज्यादातर लोगों ने घरों पर ही नमाज का फर्ज पूरा किया। इबादत और तिलावत का जोर रहा।
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शुक्रवार (पहली मई) को रमजान माह का पहला जुमा था। आमतौर पर रमजान के जुमा में मस्जिदों में नमाजियों की संख्या कई गुना ज्यादा होती है, लेकिन यह पहला मौका था जब रमजान के जुमा में मस्जिदें सूनी रहीं। जिन मस्जिदों में जुमा की सामूहिक नमाज अदा की जाती है वहां मात्र इमाम, मोअज्जिन और मुतावल्ली आदि गिने चुने लोगों ने जुमा की नमाज में शिरकत की।
इनमें शहर की नवाबी जामा मस्जिद, शेख सरवर की मस्जिद, मरकज खाली मस्जिद, हाथीखाना मस्जिद, अलीगंज मस्जिद, ऊंट मोहाल मस्जिद, कचहेरी की मस्जिद, छावनी मस्जिद, गूलरनाका मस्जिद, खुटला मस्जिद इत्यादि शामिल थी।
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गांव और कस्बों की मस्जिदों में भी यही रहा। रोजेदारों और अन्य मुस्लिमों ने ज्यादातर घरों पर ही नमाज अदा की। नमाज के बाद कोरोना से निजात और मुल्क की सलामती के लिए खासतौर से दुआएं हुई। कई इमाम और नमाजियों की आंखों में दुआ के समय आंसू आ गए। कचहरी की मस्जिद में मौलाना मुमताज रब्बानी ने रो-रोकर दुआ की।
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