बांदा। फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद दोषी दंपती की करवट बदल कर रात गुजरी। रामभवन रात 11 बजे तक बैरक नंबर तीन बी में टहलता रहा। मौत की सजा पाए रामभवन अब जेल में 40 नंबर कैदी से पहचाना जाएगा। जबकि सह दोषी उसकी पत्नी दुर्गावती की नई पहचान कैदी नंबर 41 होगी। मंडल कारागार प्रशासन ने दोनों को सीटी नंबर आवंटित कर दिए हैं। अब इन नंबरों से ही उनकी पहचान होगी।
सजा सुनाए जाने के बाद देर शाम रामभवन व उसकी पत्नी दुर्गावती जेल पहुंचे थे। जेल प्रशासन ने रामभवन को बैरक नंबर तीन बी में रखा था। जबकि उसकी पत्नी दुर्गावती को बैरक नंबर 13 में बंद किया गया है। रामभवन रात में 11 बजे तक अपनी बैरक में बेचैन हालत में टहलता रहा। उसे नींद नहीं आई। साथी बंदी भी उससे किनारा बनाए रहे। इसी तरह से इस घिनौने कृत्य में शामिल उसकी सह दोषी पत्नी दुर्गावती भी अपनी बैरक में गुमशुम बैठी दिखी। उसके सारे मंसूबे ध्वस्त रहे।
जेलर आलोक कुमार ने बताया कि रामभवन को कैदी नंबर 40 मिला है। जबकि उसकी पत्नी दुर्गावती को 41 नंबर दिया गया है। अब उनकी जेल में पहचान 40 और 41 नंबर से होगी।
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