मानसूनी मौसम का पहला पखवारा सूखा बीतने के बाद अब जुलाई की शुरुआत में फिलहाल मानसून मेहरबान नहीं हुआ है। हालांकि पहली जुलाई से भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई थी। बुंदेलखंड के बांध पूर्व की तरह तलहटी पर सिमटे और सूखे पड़े हैं।
ऐसे में सबसे ज्यादा चिंता और तनाव किसानों के चेहरों पर हैं। उनके खेतों को न बारिश का पानी मिल रहा है, न नहरों से मयस्सर हो रहा है। सिंचाई विभाग ने 5 जुलाई से नहर चलाने का रोस्टर जारी कर रखा है। मगर स्थिति यह है कि चित्रकूटधाम मंडल के 13 बांधों में मात्र तीन बांधों में 3 से लेकर 5 प्रतिशत पानी जमा हुआ है। 15 जून से अब तक सभी बांधों में कुल 187 मिलीमीटर बारिश हुई है।
जुलाई की शुरुआत में ही बारिश से बांध उफना जाते रहे हैं। नहरों को पानी भरपूर मिलने लगता था, लेकिन अबकी मानसून और मौसम रूठा हुआ है। मौसम विभाग ने जून का दूसरा पखवारा मानसूनी मौसम का था। यह सूखा बीता। मौसम विभाग ने पहली जुलाई से जोरदार बारिश का पूर्वानुमान का संकेत दिया था, पर बुंदेलखंड में यह फिलहाल कोरा रहा।
नतीजे में बांधों की स्थिति ज्यों की त्यों है। सिंचाई विभाग के ताजे आंकड़ों के मुताबिक 15 जून से अब तक सबसे ज्यादा 51 मिलीमीटर बारिश गंगऊ (छतरपुर) बांध क्षेत्र में हुई है। दूसरे नंबर पर रनगवां (छतरपुर) बांध है जहां 40 मिलीमीटर पानी बरसा है। चित्रकूट के बरुआ और अर्जुन बांधों में 10-10 तथा महोबा के उर्मिल बांध में 15 मिलीमीटर बारिश हुई है। डेड स्टोर हो चुके बांधों के लिए यह वर्षा नाकाफी है। पहली जुलाई से मानसून सक्रिय होने का पूर्वानुमान बताया गया था। लेकिन बीते दो दिनों में खासकर बांध क्षेत्रों में कोई बारिश नहीं हुई।
बारिश की बेरुखी और बांधों की बदहाली से सबसे ज्यादा चिंतित किसान हैं। यह खरीफ की बुवाई का समय है। लेकिन खेत सूखे होने से जुताई भी नहीं हो पाई। बांदा सिंचाई विभाग ने 5 जुलाई से मुख्य केन नहर चालू करने का रोस्टर जारी कर दिया है। लेकिन बरियारपुर बांध सूखा होने से नहर नहीं चल पाएंगी।