बांदा। हाल ही में हुई बेमौसम की बारिश और ओलावृष्टि से फसलों को पहुंचे नुकसान की भरपाई के लिए आर्थिक मदद को चुने गए प्रदेश के 12 जनपदों में बुंदेलखंड भी शामिल है। इन जिलों में एक तिहाई यानी 33 फीसदी से ज्यादा नुकसान माना गया है। बुंदेलखंड के पांच जनपदों के लिए प्रदेश सरकार ने 56 करोड़ 22 लाख रुपये मंजूर किए हैं। चित्रकूट, झांसी और ललितपुर एक तिहाई नुकसान वाले जिलों में शामिल नहीं हैं।
सूखे से बुंदेलखंड में बुआई बहुत कम हुई है। जहां सिंचाई के लिए पानी का जुगाड़ था वहां किसानों ने गेहूं, चना, मटर, अरहर आदि बो दी। यह काफी हद तक तैयार हो चुकी थी लेकिन इसी महीने इन फसलों पर मौसम की मार पड़ गई।
बारिश और ओला से लहलहाते खेत मटियामेट हो गए। प्रदेश सरकार ने राजस्व विभाग के माध्यम से तत्काल सर्वे कराकर नुकसान का आंकलन किया। जिलाधिकारियों द्वारा भेजी गई रिपोर्ट के बाद सरकार ने एक तिहाई से ज्यादा फसलों को नुकसान वाले बांदा, महोबा, हमीरपुर और जालौन को 56 करोड़ 22 लाख 78 हजार 16 रुपये स्वीकृत किए हैं।
प्रमुख सचिव (राजस्व) ने कहा है कि प्रभावित जिलों को फिलहाल 5 करोड़ रुपये जारी कर दिए गए हैं। शेष राहत अप्रैल माह में राज्य आपदा मोचक निधि से दी जाएगी। बांदा जनपद को 3 करोड़ 63 लाख 91 हजार 100 रुपये, महोबा को 4 करोड़ 63 लाख 86 हजार, हमीरपुर को 8 करोड़ 37 लाख 34 हजार 684 रुपये और जालौन जिले को 39 करोड़ 57 लाख 66 हजार 232 रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
सूखा राहत में बुंदेलखंड को 14.62 करोड़ और
बांदा। सूखा पीड़ितों को प्रदेश सरकार द्वारा किश्तों में दी जा रही आर्थिक मदद के क्रम में अब बुंदेलखंड को 14.62 करोड़ रुपये और स्वीकृत हुए हैं। इन्हें पीड़ित किसानों को कृषि निवेश अनुदान के रूप में दिया जाएगा। धनराशि ई-पेमेंट के जरिये किसानों के खाते में भेजी जाएगी।
प्रदेश सरकार अब तक कई किश्तों में बुंदेलखंड को सूखा राहत अनुदान देती चली आ रही है। अब बुंदेलखंड के 6 जनपदों को 14 करोड़ 62 लाख रुपये और दिए गए हैं। इसमें सबसे ज्यादा 3 करोड़ 82 लाख रुपये बांदा को मिले हैं।
महोबा को 3 करोड़ 32 लाख, चित्रकूट को 2 करोड़ 50 लाख, हमीरपुर को एक करोड़, जालौन को 48 लाख और ललितपुर 3 करोड़ 50 लाख रुपये स्वीकृत हुए हैं। प्रदेश सरकार ने यह भी निर्देश दिया है कि सहायता पाने वाले किसानों के नाम और धनराशि की सूची ग्राम सभा के नोटिस बोर्ड पर लगाई जाए। साथ ही ग्राम पंचायत की खुली बैठक में इसे पढ़कर सुनाया जाए।